अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गाजा में शांति, प्रशासन और पुनर्निर्माण की नई योजना के तहत गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शामिल होने का न्योता दिया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा की। इस बोर्ड में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है।
दरअसल, गाजा पीस प्लान अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। इसी के तहत ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए ‘नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा’ (NCAG) के गठन का ऐलान किया है। इस कमेटी की निगरानी, फंड जुटाने और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाया गया है, जिसकी अध्यक्षता खुद राष्ट्रपति ट्रम्प कर रहे हैं। इसके अलावा एक अलग ‘गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड’ का भी गठन किया गया है।

इजराइल ने जताई आपत्ति
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने अमेरिका की इस घोषणा पर नाराजगी जताई है। इजराइल का कहना है कि गाजा के लिए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने उससे बिना सलाह-मशविरा किए कर दी, जो उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है। इजराइली विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाने वाले हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल की सबसे बड़ी आपत्ति तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान को गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किए जाने को लेकर है। इजराइल तुर्किए को हमास का समर्थक मानता है और दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन इजराइल की गाजा कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते रहे हैं।
इजराइली राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने भी इस योजना की आलोचना करते हुए कहा कि गाजा को किसी कार्यकारी बोर्ड की नहीं, बल्कि हमास के पूरी तरह खात्मे की जरूरत है।
पाकिस्तान को भी मिला निमंत्रण
पाकिस्तान ने भी पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक न्योता मिला है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता रहेगा और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप फिलिस्तीन मुद्दे का स्थायी समाधान चाहता है।

बोर्ड के सदस्यों की जिम्मेदारियां
व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस और गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड के हर सदस्य को एक निश्चित पोर्टफोलियो सौंपा जाएगा। इनमें शासन व्यवस्था मजबूत करना, क्षेत्रीय कूटनीति, पुनर्निर्माण, फंडिंग और पूंजी जुटाना शामिल है। आने वाले हफ्तों में बोर्ड के और सदस्यों के नामों की घोषणा की जाएगी।
NCAG का नेतृत्व डॉ. अली शा’थ करेंगे, जिन्हें गाजा में पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं की बहाली, नागरिक संस्थाओं को मजबूत करने और सामान्य जनजीवन को स्थिर करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सदस्यता फीस को लेकर विवाद
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि बोर्ड ऑफ पीस की स्थायी सदस्यता के लिए पहले साल में 1 अरब डॉलर की फीस देनी होगी। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को भ्रामक बताया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड में शामिल होने के लिए कोई न्यूनतम फीस तय नहीं है और स्थायी सदस्यता उन्हीं देशों को दी जाएगी, जो शांति, सुरक्षा और समृद्धि के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाएंगे।

भारतवंशी अजय बंगा भी बोर्ड में
व्हाइट हाउस ने बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की है, जिसमें कुल 7 लोग शामिल हैं। इनमें विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष और भारतवंशी अजय बंगा का नाम भी है। पुणे में जन्मे अजय बंगा वर्तमान में वर्ल्ड बैंक के 14वें अध्यक्ष हैं और इससे पहले मास्टरकार्ड के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सहित कई अहम पदों पर रह चुके हैं।
गाजा की सुरक्षा अमेरिकी जनरल के जिम्मे
गाजा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आतंकवाद खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना के मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स को इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) का कमांडर नियुक्त किया गया है। वे डी-मिलिट्राइजेशन, मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण से जुड़े संसाधनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे।
स्थायी शांति का दावा
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह पूरी योजना 20 बिंदुओं वाले रोडमैप पर आधारित है, जिसका मकसद गाजा में स्थायी शांति, स्थिरता और समृद्धि लाना है। योजना के तहत युद्धविराम, बंधकों की रिहाई, सैन्य गतिविधियों की रोक और गाजा के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।
व्हाइट हाउस ने इजराइल, प्रमुख अरब देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे NCAG, बोर्ड ऑफ पीस और ISF के साथ सहयोग करें, ताकि गाजा में शांति और विकास की इस महत्वाकांक्षी योजना को तेजी से लागू किया जा सके।