दतिया जिले में अवैध खनन पर रोक लगाने के प्रशासनिक दावे एक बार फिर खोखले साबित होते नजर आए हैं। सेंवढ़ा अनुभाग के धौर्रा गांव में सिंध नदी से रेत माफिया खुलेआम अवैध खनन कर रहे थे। सूचना मिलने पर राजस्व, खनिज विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश दी, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही माफिया फरार हो गए।
सिंध नदी से धड़ल्ले से निकाली जा रही थी रेत
मंगलवार को खनिज विभाग के अधिकारी प्रदीप भूरिया को सिंध नदी में अवैध रेत खनन की शिकायत मिली थी। शिकायत की पुष्टि होते ही उन्होंने स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। टीम ने देखा कि नदी के किनारे बड़े पैमाने पर खनन किया जा रहा था और भारी मात्रा में अवैध रूप से निकाली गई रेत मौजूद थी।
खंतियां खोदकर करते हैं खनन
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सेंवढ़ा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन का संगठित खेल चल रहा है। प्रशासन और वन विभाग की टीम समय-समय पर कार्रवाई कर खंतियां खुदवाती है, लेकिन कुछ ही दिनों में रेत माफिया उन खंतियों को दोबारा बंद कर फिर से खनन शुरू कर देते हैं। इससे साफ है कि माफिया प्रशासनिक कार्रवाई से बेपरवाह होकर बार-बार कानून को चुनौती दे रहे हैं।
पनडुब्बी जलाई, एलएनटी मशीन जब्त
कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध रूप से निकाली गई रेत को नष्ट किया गया। इसके साथ ही खनन में इस्तेमाल की जा रही पनडुब्बी को विभागीय टीम ने मौके पर ही जलाकर नष्ट कर दिया। वहीं एक अवैध खनन में लगी एलएनटी मशीन को जब्त किया गया है। हालांकि, माफिया पहले ही फरार हो चुके थे।

कार्रवाई की पहले ही मिल गई थी सूचना
बताया जा रहा है कि टीम के पहुंचने से पहले ही खनन माफियाओं को कार्रवाई की सूचना मिल गई थी, जिसके चलते वे मौके से भागने में सफल रहे। इस घटना ने विभागीय कार्यप्रणाली और सूचना लीक होने की आशंका को भी जन्म दिया है।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई: खनिज विभाग
खनिज अधिकारी प्रदीप भूरिया ने बताया कि इस मामले में आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन करने वालों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर दोषियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि सिंध नदी क्षेत्र में अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक दावों पर उठे सवाल
हालांकि, मौके से माफियाओं का फरार हो जाना एक बार फिर प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो सिंध नदी का अस्तित्व और पर्यावरण दोनों गंभीर संकट में पड़ सकते हैं।