दतिया में स्वास्थ्य विभाग के भीतर टकराव, सीएचओ ने सीएमएचओ पर लगाए गंभीर आरोप
मानसिक प्रताड़ना, अपमानजनक शब्दों और दबाव का दावा, वीडियो वायरल होने से बढ़ा विवाद
दतिया जिले के परासरी उपस्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) डॉ. नेहा श्रीवास्तव और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. बीके वर्मा के बीच का विवाद अब सार्वजनिक रूप ले चुका है। डॉ. नेहा श्रीवास्तव ने सीएमएचओ पर मानसिक प्रताड़ना, बैठकों में अपमानजनक शब्दों के प्रयोग और लगातार दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले ने तब तूल पकड़ लिया, जब डॉ. श्रीवास्तव का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
निरीक्षण के बाद शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला सोमवार को सामने आया, जब सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा ने परासरी उपस्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डॉ. नेहा श्रीवास्तव मौके पर अनुपस्थित पाई गईं, जिसके बाद सीएमएचओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि वे सीएमएचओ के ही निर्देश पर अन्य स्थान पर ड्यूटी पर थीं और इससे पहले वे स्वीकृत अवकाश पर भी थीं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इससे संबंधित लिखित आदेश मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें अनुपस्थित बताकर नोटिस देना गलत और मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।
वायरल वीडियो में छलका दर्द
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में डॉ. नेहा श्रीवास्तव ने खुलकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा कि सीएमएचओ के व्यवहार के कारण वे लंबे समय से मानसिक तनाव में हैं। बैठकों के दौरान उनके लिए आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं, जिससे उन्हें अपमानित महसूस होता है।
वीडियो में उन्होंने यहां तक कहा कि यदि उन्हें कुछ भी होता है, तो इसके लिए सीएमएचओ जिम्मेदार होंगे। इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया तथा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

5 दिन का वेतन कटौती आदेश बना विवाद की जड़
सूत्रों के अनुसार, इस विवाद की जड़ 24 दिसंबर को जारी एक आदेश है। सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अपेक्षित प्रगति न होने के चलते कई सीएचओ का पांच दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए थे।
डॉ. नेहा श्रीवास्तव ने इस आदेश का विरोध करते हुए सीएमएचओ कार्यालय में ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने अपने कार्य को संतोषजनक बताते हुए मूल वेतन से कटौती न करने की मांग की थी। माना जा रहा है कि इसी विरोध के बाद से उनके और सीएमएचओ के बीच तनातनी बढ़ गई।
सीएमएचओ ने आरोपों को बताया निराधार
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा ने डॉ. श्रीवास्तव के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा,
“यह तो चोरी और सीनाजोरी है। कैचअप राउंड था। मौके पर नहीं मिलीं तो नोटिस दिया गया। नियमानुसार जवाब देना चाहिए था।”
डॉ. वर्मा ने यह भी दावा किया कि उन्हें डॉ. श्रीवास्तव के खिलाफ मौखिक शिकायतें मिल रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. श्रीवास्तव ने मंगलवार को ग्वालियर से कार में बैठकर अटेंडेंस लगाई है और इस संबंध में वे कलेक्टर को सभी साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
जांच और कार्रवाई की संभावना
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामला संवेदनशील होने के कारण अब इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जहां एक ओर अधिकारी पर कार्रवाई संभव है, वहीं नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सीएचओ पर भी कार्रवाई हो सकती है