अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत–पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने के दावे को लेकर भारत की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए ट्रम्प के बयानों को लगातार दोहराया जाने वाला “खुद का श्रेय लेने का दावा” बताया है।
दरअसल, बुधवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर कहा कि उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाया था और दोनों देश न्यूक्लियर युद्ध के बेहद करीब पहुंच गए थे।
कांग्रेस का तंज: यह ट्रम्प का 71वां दावा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रम्प के दावोस भाषण का वीडियो शेयर करते हुए लिखा,
“कल तक गिनती 70 थी और आज यह 71 हो गई है। यह याद रखना चाहिए कि दावोस में भारत का एक बड़ा आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल मौजूद है।”
कांग्रेस का कहना है कि ट्रम्प बार-बार एक ही बात दोहराकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार पहले ही इन दावों को सिरे से खारिज कर चुकी है।

दावोस में क्या बोले ट्रम्प
WEF में अपने संबोधन के दौरान ट्रम्प ने कहा कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच गंभीर सैन्य टकराव हुआ था।
उन्होंने दावा किया,
“भारत और पाकिस्तान न्यूक्लियर युद्ध के बेहद करीब पहुंच गए थे। हमने समय रहते हस्तक्षेप किया और लाखों लोगों की जान बचाई।”
ट्रम्प के मुताबिक, अगर यह युद्ध नहीं रुकता तो 10 से 20 मिलियन लोगों की जान जा सकती थी।
व्हाइट हाउस में भी दोहराया था दावा
इससे पहले बुधवार सुबह वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ट्रम्प ने यही दावा किया था। उन्होंने कहा कि अपने दूसरे कार्यकाल के पहले साल में उन्होंने कई “ना सुलझने वाले युद्ध” खत्म किए, जिनमें भारत–पाक संघर्ष भी शामिल है।

जयराम रमेश का पीएम मोदी पर भी तंज
जयराम रमेश ने इससे पहले भी ट्रम्प के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा था। उन्होंने लिखा था कि
“प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ और उन्हें कई बार जबरन गले लगाने वाले यह दावा कर चुके हैं कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक रुकने के लिए वे जिम्मेदार थे।”
कांग्रेस का कहना है कि सरकार को साफ बताना चाहिए कि भारत की संप्रभुता और सैन्य फैसलों में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं रही।
चीन भी कर चुका है ऐसा ही दावा
दिलचस्प बात यह है कि भारत–पाक तनाव कम कराने का दावा सिर्फ ट्रम्प ने ही नहीं किया।
30 दिसंबर 2025 को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य तनाव को कम कराने में भूमिका निभाई थी।
हालांकि, भारत सरकार ने चीन के इस दावे को भी सख्ती से खारिज कर दिया था और साफ कहा था कि यह पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सैन्य बातचीत का नतीजा था।
भारत का स्पष्ट रुख: कोई तीसरा पक्ष नहीं
भारत सरकार पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुकी है कि भारत–पाक संघर्ष को रुकवाने में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक,
- भारी नुकसान के बाद पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने भारतीय सेना से संपर्क किया।
- पाकिस्तान के DGMO ने भारतीय DGMO से बातचीत की।
- इसके बाद 10 मई 2025 से जमीन, हवा और समुद्र में सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमति बनी।
क्या था ऑपरेशन सिंदूर
भारत–पाक सैन्य तनाव की शुरुआत 6 और 7 मई 2025 की रात से हुई थी।
- भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया।
- इन ठिकानों में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर और मुरीदके जैसे इलाके शामिल थे।
इसके जवाब में
- 8 मई की शाम पाकिस्तान ने भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश की।
- पाकिस्तान ने तुर्किये और चीन निर्मित ड्रोन का इस्तेमाल किया, लेकिन भारत की मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने इन्हें नाकाम कर दिया।
भारतीय सेना ने भी सीमा पार पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए भारी तोपखाने और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किया, जिससे पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
सियासत बनाम कूटनीति
एक ओर डोनाल्ड ट्रम्प लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत–पाक युद्ध रुकवाने का श्रेय ले रहे हैं, वहीं भारत सरकार और कांग्रेस दोनों ही इसे तथ्यों के खिलाफ और भ्रामक बता रहे हैं।
इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति और विदेश नीति से जुड़ी बहस और तेज होने के संकेत हैं।