भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) को फिर से सक्रिय करने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत गठित टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत 2027-28 से स्कूल सिलेबस में स्थानीय विषय और टॉपिक्स शामिल किए जाएंगे, यानी पहली से आठवीं कक्षा तक का पाठ्यक्रम अपडेट किया जाएगा।
क्यों जरूरी है एससीईआरटी की सक्रियता
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में एनसीईआरटी का सिलेबस लागू है। इससे एससीईआरटी की भूमिका सीमित हो गई थी। अब पाठ्यक्रम निर्माण, शोध और शिक्षक प्रशिक्षण के क्षेत्र में इसे फिर मजबूती दी जाएगी।
नए बदलाव और योजनाएं
- एससीईआरटी के तहत नई स्टेट लेवल कमेटी बनाई जाएगी, जो सिलेबस बदलाव, स्थानीय विषय जोड़ने और शिक्षण गुणवत्ता सुधारने का काम करेगी।
- हर विषय के लिए एससीईआरटी स्तर पर कोर ग्रुप गठित होंगे, जिनमें अनुभवी शिक्षक और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
- प्रदेश के 18 जिलों की डाइट को ‘डाइट फॉर एक्सीलेंस’ बनाया जाएगा, जो शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक नवाचार का केंद्र बनेगा।
- एससीईआरटी में लंबे समय से खाली पद भरे जाएंगे। तब तक स्थानीय शिक्षा विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी।

छात्रों को मप्र का ज्ञान मिलेगा
मप्र पाठ्यपुस्तक स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रो. अल्केश चतुर्वेदी ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबें पूरे भारत को कवर करती हैं। अब पाठ्यक्रम में बदलाव कर मप्र की लोकभाषाएं जैसे बुंदेली, बघेली, लोकगायन, कालगणना, पुरातत्व स्थल, नदियों आदि को शामिल किया जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी एनसीईआरटी उदाहरण में मणिपुर का जिक्र है, तो उसका मप्र से संबंधित उदाहरण भी जोड़ा जाएगा।
शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट
एससीईआरटी के सक्रिय होने से क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा मिलेगा। इसके लिए एक ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी बनाया जाएगा, जहां शिक्षकों को पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना
शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से स्थानीय संस्कृति, भाषा और इतिहास का ज्ञान विद्यार्थियों तक पहुंचेगा, साथ ही शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक नवाचार को भी मजबूती मिलेगी।