वॉट्सएप की प्राइवेसी पर फिर उठे सवाल, मेटा पर E2E एन्क्रिप्शन को लेकर गंभीर आरोप !

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दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप वॉट्सएप की पेरेंट कंपनी मेटा एक बार फिर यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर विवादों में घिर गई है। सैन फ्रांसिस्को की एक फेडरल कोर्ट में दायर नए क्लास-एक्शन मुकदमे में दावा किया गया है कि मेटा और वॉट्सएप अपने यूजर्स को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2E) के नाम पर गुमराह कर रहे हैं और कंपनी के पास यूजर्स की निजी बातचीत तक पहुंचने की तकनीकी क्षमता मौजूद है।

इस मुकदमे ने वॉट्सएप के उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें कहा जाता है कि यूजर की चैट पूरी तरह सुरक्षित होती है और उसे केवल भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है।

5 देशों के यूजर्स ने दायर किया क्लास-एक्शन मुकदमा

ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूजर्स के एक समूह ने अमेरिका की फेडरल कोर्ट में यह मुकदमा दायर किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मेटा और वॉट्सएप अरबों यूजर्स को यह विश्वास दिलाते हैं कि उनकी चैट पूरी तरह निजी और सुरक्षित है, जबकि हकीकत में कंपनी के पास इन मैसेजेस को स्टोर करने, उनका विश्लेषण करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें एक्सेस करने की क्षमता है।

अगर कोर्ट इस मामले को क्लास-एक्शन सूट के रूप में मंजूरी देती है, तो इसका दायरा दुनिया भर के करोड़ों वॉट्सएप यूजर्स तक फैल सकता है और मेटा को भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

मुकदमे में क्या हैं मुख्य आरोप

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वॉट्सएप का यह दावा भ्रामक है कि उसकी चैट्स को कोई तीसरा पक्ष नहीं पढ़ सकता। मुकदमे में कुछ व्हिसलब्लोअर्स के हवाले से दावा किया गया है कि मेटा के कर्मचारी विशेष परिस्थितियों में यूजर्स के डेटा और चैट्स तक पहुंच बना सकते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि कंपनी के पास ऐसी बैकएंड तकनीक मौजूद है, जिससे वह एन्क्रिप्टेड मैसेजेस को भी एक्सेस कर सकती है।

याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि मेटा अपने बिजनेस मॉडल और डेटा एनालिटिक्स के लिए यूजर्स की निजी जानकारी का इस्तेमाल करती है, जो उसकी घोषित प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ है।

मेटा ने आरोपों को बताया निराधार

मेटा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह से आधारहीन और काल्पनिक कहानी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“यह दावा करना कि लोगों के वॉट्सएप मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं हैं, पूरी तरह गलत और हास्यास्पद है।”

स्टोन के मुताबिक, वॉट्सएप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे दुनिया भर में सबसे सुरक्षित एन्क्रिप्शन सिस्टम्स में से एक माना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी याचिकाकर्ताओं के वकील के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है।

क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का मतलब है कि मैसेज भेजे जाने के साथ ही एक सीक्रेट कोड में बदल जाता है, जिसे केवल रिसीवर के डिवाइस पर ही डिकोड किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में न तो वॉट्सएप और न ही उसकी पेरेंट कंपनी मेटा मैसेज को पढ़ सकती है। वॉट्सएप का दावा है कि यही तकनीक यूजर्स की चैट को पूरी तरह सुरक्षित बनाती है। हालांकि, ताजा मुकदमे ने इसी दावे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले भी विवादों में रही है मेटा की प्राइवेसी पॉलिसी

मेटा का प्राइवेसी रिकॉर्ड पहले भी विवादों से भरा रहा है। साल 2020 में सामने आए कैम्ब्रिज एनालिटिका स्कैंडल के बाद कंपनी को 5 बिलियन डॉलर का भारी जुर्माना भरना पड़ा था। इसके अलावा सितंबर 2025 में वॉट्सएप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अताउल्लाह बेग ने भी आरोप लगाया था कि करीब 1,500 इंजीनियरों के पास यूजर्स के डेटा का अनियंत्रित एक्सेस है।

इन तमाम मामलों के चलते मेटा की डेटा सुरक्षा और यूजर प्राइवेसी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब नया मुकदमा कंपनी के लिए एक और बड़ी कानूनी चुनौती बनकर सामने आया है, जिसका असर आने वाले समय में टेक इंडस्ट्री और यूजर्स की डिजिटल प्राइवेसी पर भी पड़ सकता है।

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