आधार विजन 2032: फेस रिकग्निशन, एआई और क्वांटम तकनीक से होगा आधार तेज और सुरक्षित !

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सरकार ने आधार के तकनीकी ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। ‘आधार विजन 2032’ नामक दस्तावेज तैयार हो गया है, जिसमें एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने की सिफारिश की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य आधार को तेज, सुरक्षित और फ्रॉड-फ्री बनाना है।

प्रमुख बदलाव

  1. फेसियल रिकग्निशन प्राथमिक माध्यम:
    नई व्यवस्था में फिंगरप्रिंट की बजाय फेशियल रिकग्निशन को प्राथमिक ऑथेंटिकेशन माध्यम बनाया जाएगा। रोज लगभग 9 करोड़ आधार ऑथेंटिकेशन होते हैं, जिनमें से करीब 1 करोड़ फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए होते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि हर महीने 100 करोड़ ऑथेंटिकेशन फेस रिकग्निशन से किए जाएं।
  2. एआई अपडेटेड बायोमैट्रिक्स:
    एआई सिस्टम से फेशियल रिकग्निशन समय-समय पर अपडेट होगा, जिससे नागरिकों को बार-बार बायोमैट्रिक देने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
  3. बच्चों और किशोरों का अपडेट:
    सरकार दिसंबर तक 5 करोड़ बच्चों और किशोरों का बायोमैट्रिक अपडेट कर चुकी है। यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक निशुल्क जारी रहेगी।

तकनीकी ढांचे की तैयारी

‘आधार विजन 2032’ दस्तावेज के अनुसार समिति का प्रारूप अगले महीने अंतिम रूप देगा और मार्च 2026 में यूआईडीएआई को सौंपा जाएगा। इसके आधार पर अगले पांच साल के लिए नया तकनीकी ढांचा तैयार होगा। मौजूदा अनुबंध 2027 में समाप्त हो रहा है, और 2032 तक के लिए नया अनुबंध किया जाएगा।

समिति और विशेषज्ञ

इस दस्तावेज को बनाने के लिए अक्टूबर 2025 में यूआईडीएआई के चेयरमैन नीलकांत मिश्रा की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। समिति में शामिल थे:

  • सर्वम् एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन
  • न्यूटनिक्स के संस्थापक धीरज पांडेय
  • अमृता यूनिवर्सिटी के डॉ. पी. पूर्णचंद्रन
  • मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रो. अनिल जैन
  • आईआईटी जोधपुर के मयंक वत्स

आधार सीईओ का बयान

यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार ने कहा कि ‘विजन 2032’ का लक्ष्य स्पष्ट है, लेकिन तैयारी भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखकर हो रही है। उन्होंने बताया कि एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग से तकनीकी परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और नई व्यवस्था के तहत आधार प्रणाली को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाया जाएगा।

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