उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचाने और भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के उद्देश्य से विक्रमोत्सव-2026 का आयोजन उज्जैन में 15 फरवरी से 19 मार्च तक किया जाएगा। इस भव्य उत्सव में देश के साथ-साथ विदेशों से भी कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में बैठक कर विक्रमोत्सव की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह आयोजन हर स्तर पर भव्य, सुव्यवस्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर का दिखाई देना चाहिए।
नई पीढ़ी को सम्राट विक्रमादित्य से जोड़ना लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का साहस, शौर्य, न्यायप्रियता और सांस्कृतिक योगदान भारतीय सभ्यता की आत्मा को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को उनके जीवन, आदर्शों और योगदान से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विक्रमोत्सव इसी उद्देश्य को लेकर आयोजित किया जा रहा है।
आध्यात्मिक आयोजनों से होगी शुरुआत
विक्रमोत्सव की शुरुआत शिव पूजा और शिवनाद जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रमों से होगी। इसके बाद पूरे आयोजन काल में उज्जैन शहर सांस्कृतिक, साहित्यिक और वैचारिक गतिविधियों का केंद्र बना रहेगा।

सांस्कृतिक, साहित्यिक और वैचारिक कार्यक्रमों की भरमार
विक्रमोत्सव के दौरान कई प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें—
- नाट्य समारोह
- इतिहास एवं शोध विषयक संगोष्ठियां
- अखिल भारतीय कवि सम्मेलन
- वेद अंताक्षरी
- संगीत और संस्कृति पर विचार-विमर्श
शामिल हैं। इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव होगा खास आकर्षण
उज्जैनवासियों और पर्यटकों के लिए 13 से 17 मार्च तक आयोजित होने वाला अंतरराष्ट्रीय पौराणिक फिल्म महोत्सव विशेष आकर्षण रहेगा। इस महोत्सव में 20 से अधिक देशों की पौराणिक और सांस्कृतिक फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे दर्शकों को विभिन्न देशों की सांस्कृतिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
विज्ञान, कृषि और लोकसंस्कृति को भी मिलेगा मंच
विक्रमोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें—
- विज्ञान आधारित कार्यक्रम
- कृषि और प्राकृतिक खेती पर चर्चा
- नरवाई प्रबंधन
- दुग्ध उत्पादक पशुओं की प्रतियोगिता
- कृषि प्रदर्शनी
जैसे आयोजन भी शामिल होंगे, जो किसानों और आम नागरिकों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।
19 मार्च को शिप्रा तट पर होगा मुख्य समारोह
19 मार्च को वर्ष प्रतिपदा, सृष्टि आरंभ दिवस और उज्जयिनी गौरव दिवस के अवसर पर शिप्रा तट पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर—
- सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण प्रदान किया जाएगा
- विक्रम पंचांग का लोकार्पण होगा
- भव्य आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा
मुख्य समारोह में देश के प्रसिद्ध गायक सोनू निगम अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे।
उज्जैन को मिलेगी नई सांस्कृतिक पहचान
विक्रमोत्सव-2026 को लेकर प्रशासन और आम नागरिकों में उत्साह है। यह आयोजन न केवल उज्जैन की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त करेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान भी दिलाएगा।
विक्रमोत्सव-2026 हर नागरिक को भारतीय संस्कृति, इतिहास और परंपरा से जुड़ने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा।