बीना सिविल अस्पताल में कड़ाके की सर्दी के बीच मरीजों की मुश्किलें बढ़ीं, स्टाफ रूम में हीटर चलते रहे !

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बीना। शहर के सरकारी सिविल अस्पताल में कड़ाके की सर्दी के बावजूद मरीजों को गर्माहट देने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। अस्पताल के वार्डों में अधिकांश मरीज और उनके परिजन घर से लाए कंबल और रजाई में लिपटे हुए हैं, जबकि नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी रूम में हीटर चलाकर राहत पा रहे हैं। कई बार स्टाफ रूम में हीटर खाली ही चलता पाया गया।

मरीजों और परिजनों की दिक्कत

बीते चार दिनों से तापमान लगातार गिर रहा है, जिससे अस्पताल में भर्ती मरीजों को ठिठुरने को मजबूर होना पड़ रहा है। भास्कर डिजिटल की टीम ने जब अस्पताल के जनरल और महिला वार्ड का जायजा लिया, तो अधिकांश मरीज घर से लाए शॉल, रजाई और कंबल में लिपटे दिखाई दिए। अटेंडर राजेंद्र प्रजापति ने बताया कि मरीजों को केवल एक कंबल उपलब्ध कराया गया है, और बढ़ती ठंड के कारण उन्हें घर से अतिरिक्त बिस्तर मंगवाने पड़े।

मरीज के परिजन खुशीलाल अहिरवार ने कहा, “अस्पताल प्रबंधन को सर्दी के मौसम में मरीजों के लिए हीटर और पर्याप्त कंबल की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उन्हें ठंड में राहत मिल सके।”

खाली स्टाफ रूम में चलता हीटर

अस्पताल प्रबंधन को भले ही मरीजों की दिक्कत का आभास न हो, लेकिन रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान नर्सिंग स्टाफ अपने ड्यूटी रूम में हीटर चला कर गर्माहट ले रहा है। दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने मौके पर देखा कि कई बार स्टाफ रूम में हीटर चलते रहे, जबकि वहां कोई मौजूद नहीं था।

अस्पताल प्रशासन का जवाब

बीना के बीएमओ डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि मरीजों के लिए पर्याप्त संख्या में हीटर मौजूद थे, लेकिन कुछ हीटर खराब हो चुके हैं और कुछ हीटर मरीजों के परिजनों द्वारा ले जा दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “मरीजों के लिए पर्याप्त कंबल भी उपलब्ध हैं। यदि अटेंडर कंबल मांगते हैं तो उपलब्ध होने पर उन्हें दे दिया जाता है। मरीजों की संख्या अधिक होने पर ही कंबल की कमी हो सकती है।”

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि यदि स्टाफ रूम में कोई भी उपलब्ध नहीं है और हीटर चल रहा है, तो यह गलत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि स्टाफ को इस बारे में समझाइश दी जाएगी और भविष्य में यह गलती नहीं होगी।

अस्पताल प्रशासन ने कहा, “जल्दी ही नई व्यवस्था लागू की जाएगी और स्टाफ को निर्देश दिए जाएंगे कि खाली कमरे में हीटर न चलाएं। इससे मरीजों की सुविधा और ऊर्जा की बर्बादी दोनों रोकी जा सकेगी।”

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