4 फुट बर्फ, माइनस 6 डिग्री तापमान और जानलेवा रास्ते: डोडरा-क्वार में जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों की जांबाजी बनी मिसाल !

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हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार (रोहड़ू) से सामने आई यह कहानी सिर्फ कर्तव्य निभाने की नहीं, बल्कि जांबाजी, समर्पण और सिस्टम की असल तस्वीर दिखाने वाली है।
यहां जल शक्ति विभाग के दो कर्मचारियों ने भारी बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और जानलेवा हालात के बीच पेयजल योजना बहाल कर सैकड़ों ग्रामीणों को राहत पहुंचाई


बर्फबारी ने ठप की पेयजल आपूर्ति

डोडरा-क्वार क्षेत्र में

  • 23 जनवरी को करीब पौने तीन फीट
  • 27 जनवरी को डेढ़ से दो फीट तक बर्फबारी हुई।

लगातार बर्फ गिरने से ‘सटू सौर पेयजल स्कीम’ पर एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसका असर यह हुआ कि धंदरवाड़ी गांव के करीब 300 घरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई।
भीषण ठंड के बीच पानी बंद होने से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ती चली गईं।


माइनस 6 डिग्री में 3 किलोमीटर की खतरनाक चढ़ाई

हालात कितने कठिन थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिन में भी तापमान माइनस 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरा हुआ था।
ऐसे में जल शक्ति विभाग के कर्मचारी वीर मोहन और सुशील कुमार ने जिम्मेदारी संभाली।

दोनों—

  • भारी गर्म कपड़े पहनकर
  • जरूरी औजार और पाइप कंधों पर उठाकर
  • करीब 4 फुट बर्फ के बीच 3 किलोमीटर पैदल पहाड़ी चढ़ाई करते हुए
    लगभग तीन घंटे बाद उस स्थान पर पहुंचे, जहां पाइपलाइन टूटी हुई थी।

जरा सी चूक और नीचे गहरी खाई

जहां पाइपलाइन क्षतिग्रस्त थी, वहां नीचे गहरी खाई और ऊपर जमी बर्फ—
एक गलत कदम जानलेवा हो सकता था।
फिसलन इतनी ज्यादा थी कि संतुलन बिगड़ने पर बचने की कोई गुंजाइश नहीं थी।

इसके बावजूद वीर मोहन और सुशील कुमार ने—

  • बर्फ में दबी पाइपों को बाहर निकाला
  • क्षतिग्रस्त हिस्से को जोड़ा
  • कड़कती ठंड में घंटों काम किया

उनकी मेहनत रंग लाई और तीसरे दिन गांव में फिर से पानी की सप्लाई शुरू हो गई


15 हजार फीट ऊंचाई से जुड़ी है यह पेयजल योजना

यह पेयजल योजना करीब 15 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित चांशल दर्रे से सटे क्षेत्र से शुरू होती है।
चांशल घाटी में इस समय 7 से 8 फीट तक बर्फ जमी हुई है।
इसी घाटी के निचले हिस्से से धंदरवाड़ी गांव के लिए पानी लाया जाता है।


सिस्टम की हकीकत भी आई सामने

यह घटना सिर्फ दो कर्मचारियों की बहादुरी की कहानी नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई भी उजागर करती है, जहां—

  • नाममात्र मानदेय पर
  • बिना पर्याप्त संसाधनों के
  • कर्मचारी दुर्गम इलाकों में लोगों की जीवनरेखा बनी सेवाओं को जिंदा रखे हुए हैं।

डोडरा-क्वार जैसे इलाकों में सिर्फ जल शक्ति विभाग ही नहीं, बल्कि
बिजली विभाग, पुलिस और PWD के कर्मचारी भी हर बर्फबारी में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं।


गांव में तारीफ, सोशल मीडिया पर चर्चा

वीर मोहन और सुशील कुमार की इस जांबाजी की अब पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों के दम पर ही दुर्गम हिमालयी गांवों में जीवन संभव हो पाता है।

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