मध्यप्रदेश में फर्जी दस्तावेज से मेडिकल सीट का मामला सामने आया !

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भोपाल। मध्यप्रदेश की अदालतों ने बीते तीन दिनों में दो डॉक्टरों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी मेडिकल सीट हासिल करने के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। दोनों ही डॉक्टरों ने खुद को मध्यप्रदेश का मूल निवासी बताकर राज्य कोटे का लाभ लिया था। अदालत ने कहा कि यह केवल धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि योग्य छात्रों का हक छीनने जैसा अपराध है।


डॉ. सीताराम शर्मा को जेल

30 जनवरी 2026 को भोपाल की 23वीं अपर सत्र न्यायालय ने डॉ. सीताराम शर्मा को दोषी करार दिया। अदालत ने पाया कि आरोपी ने फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवाकर मेडिकल सीट हासिल की थी।

  • आरोपित को धारा 420, 467, 468 के तहत 3-3 साल की सश्रम कैद और
  • धारा 471 के तहत 2 साल की सश्रम कैद सुनाई।
  • सभी धाराओं में अलग-अलग 500 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

एसटीएफ भोपाल के विशेष लोक अभियोजक आकिल खान और सुधाविजय सिंह भदौरिया ने कोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष रखा।


मामला: उत्तर प्रदेश का निवासी, मध्यप्रदेश का दिखाया

जांच में सामने आया कि सीताराम शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है। उसने यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई की थी, लेकिन मुरैना जिले की अंबाह तहसील से फर्जी मूल निवासी प्रमाण पत्र तैयार करवा कर पीएमटी परीक्षा के बाद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया।

सत्यापन में प्रमाण पत्र तहसील रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था। आरोपी वर्तमान में भिंड जिले के एक सरकारी अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत था।

कोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने कहा कि एक सरकारी डॉक्टर द्वारा किया गया यह अपराध गंभीर है। फर्जी दस्तावेज से सीट लेने का मतलब किसी योग्य छात्र से उसका हक छीनना है। ऐसे मामलों में सख्त सजा अनिवार्य है।


तीन दिन पहले सुनील सोनकर को भी दोषी ठहराया

27 जनवरी 2026 को भोपाल की इसी अदालत ने डॉ. सुनील सोनकर को दोषी ठहराया। आरोपी ने 2010 में पीएमटी परीक्षा पास करने के बाद खुद को मध्यप्रदेश का निवासी बताकर गांधी मेडिकल कॉलेज में सरकारी सीट हासिल की।

  • जांच में पाया गया कि उनका मूल निवासी प्रमाण पत्र फर्जी था।
  • अदालत ने उन्हें भी धारा 420, 467, 468, 471 के तहत अधिकतम 3 साल की सश्रम कैद और जुर्माना सुनाया।
  • यह मामला 15 साल लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद निपटा।

विशेष लोक अभियोजक का बयान

आकिल खान ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी मेडिकल सीट लेना न केवल कानून का अपराध है, बल्कि इससे सिस्टम पर लोगों का भरोसा भी टूटता है। अदालत के फैसलों से साफ संदेश गया है कि चाहे डॉक्टर हों या कोई और, फर्जीवाड़ा करने वालों को सजा जरूर मिलेगी

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