“पिता का आँचल जिसने बचपन में सुकून दिया, आज उसी की गोद में मौत का फंदा झूल रहा था…”
सागर (मध्य प्रदेश): रविवार की वह शाम जमुनिया गाँव के मुन्ना सिंह लोधी के लिए नर्क बनकर आई। वह पल किसी डरावने सपने की तरह था, जब उन्हीं के बेटे संजय ने उनके गले में रस्सी का फंदा डालकर फाँसी लगाने की कोशिश की। शराब के नशे में धुत संजय का यह कृत्य न सिर्फ़ एक पिता के दिल पर गहरा ज़ख़्म बनकर रह गया, बल्कि समाज के सामने ‘कलयुगी नैतिक पतन’ का वह दृश्य पेश किया, जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

वह भयावह पल: “मेरा ही बेटा मुझे मारने पर उतारू हो गया!”
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला, जिसमें साफ़ देखा जा सकता है कि कैसे संजय अपने पिता के गले में रस्सी लपेटकर उन्हें जबरन खींच रहा है। मुन्ना सिंह की आँखों में मौत का डर और बेटे के हाथों अपमान का गुस्सा एक साथ झलक रहा था। पास खड़ी माँ और एक गाँव वाले ने जैसे-तैसे संजय को रोका, लेकिन नशे की हालत में वह पागलों की तरह चीखता रहा।
मुन्ना सिंह की आवाज़ भर्राई हुई थी जब उन्होंने कहा, “यह मेरा ही बेटा है… जिसे मैंने पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वही मेरी जान लेने पर आमादा है। शराब पीकर हर दिन मारपीट करता है, लेकिन आज तो उसने हद ही पार कर दी…”

परिवार का सिसकता दर्द: “अब डर लगता है अपने ही घर में”
घर की दहलीज़ पर खून के रिश्तों की बलि चढ़ चुकी थी। संजय की माँ का काँपता हुआ हाथ और बाकी परिजनों की सहमी निगाहें इस घटना के बाद की मानसिक तस्वीर बयान कर रही थीं। पड़ोसी भी हैरान थे— “ये कैसा कलयुग आ गया है कि बाप को फाँसी देने का ज़मीर जाग गया?”

पुलिस कार्रवाई: धाराएँ लगीं, लेकिन सवाल बाकी
बंडा पुलिस ने संजय के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कानून इस ‘कलयुगी पुत्र’ के ज़ुल्मों का इंसाफ़ कर पाएगा? क्या शराब और हिंसा की इस सामाजिक बीमारी का कोई इलाज है?
समाज के लिए एक चेतावनी
यह घटना सिर्फ़ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस सड़ांध की ओर इशारा करती है जहाँ नशा, असंयम और पारिवारिक मूल्यों का पतन एक युवा को ‘पितृहंता’ बना देता है। आख़िर कब तक हम ऐसी घटनाओं को ‘कलयुग का प्रभाव’ कहकर नज़रअंदाज़ करते रहेंगे?
“जिस घर में बच्चे पिता का सम्मान नहीं करते, वहाँ भगवान भी नहीं ठहरते…” — यह कहावत आज फिर सच साबित हुई है।
व्यूरो रिपोर्ट – रिपब्लिक सागर मीडिया
संवाददाता – अर्पित सेन
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