सागर जिले के बांदरी थाना की रजवांस पुलिस चौकी प्रभारी, मनोज पटेल पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप लगाने वाले दो लोग—मोरपाल यादव और सावित्री बाई—ने पुलिस द्वारा रिश्वत लेने और उनके मामलों में उचित कार्रवाई न करने की शिकायत एसपी कार्यालय में की है। यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है, क्योंकि इसमें न केवल भ्रष्टाचार के आरोप हैं, बल्कि पुलिस की निष्क्रियता और अधिकारों का उल्लंघन भी प्रतीत हो रहा है।

शिकायतकर्ता का बयान: मोरपाल यादव
मोरपाल यादव एक किराना व्यापारी हैं, जिनकी दुकान 27 फरवरी को आग की चपेट में आ गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव के एक व्यक्ति ने जानबूझकर उनकी दुकान में आग लगाई थी। मोरपाल यादव ने बताया कि जब उन्होंने पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज करानी चाही, तो पुलिस ने उनसे 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। उन्होंने इसके बाद पुलिस को 5,000 रुपये दिए, और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 5,000 रुपये और देने का वादा किया। लेकिन दुख की बात यह है कि इस पर भी उनकी सुनवाई नहीं हुई, और न ही आरोपित व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।
मोरपाल यादव ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मारपीट का भी शिकार बनाया गया और पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। इस स्थिति में, उन्होंने एसपी से इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता सावित्री बाई का बयान
सावित्री बाई ने भी एक अन्य घटना के संदर्भ में आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके गांव में मारपीट की घटना हुई थी, और जब उन्होंने इस मामले में रजवांस चौकी में रिपोर्ट दर्ज करानी चाही, तो पुलिस चौकी प्रभारी मनोज पटेल ने उनसे साढ़े चार हजार रुपये की रिश्वत ली। उनके अनुसार, यह पूरी तरह से अवैध था, और पुलिस ने न केवल उनका मामला दर्ज करने में आनाकानी की, बल्कि उनकी शिकायत की अनदेखी भी की।
सावित्री बाई ने भी यह आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई थी, लेकिन पुलिस ने इसकी कोई जांच नहीं की। इससे जाहिर होता है कि पुलिस की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार के आरोप केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में व्याप्त हैं।

रजवांस चौकी प्रभारी का बचाव
इन आरोपों के बाद, रजवांस चौकी प्रभारी मनोज पटेल ने इन सभी आरोपों को निराधार और गलत बताया है। उन्होंने कहा कि मोरपाल यादव की दुकान में आग लगने का मामला संदेहास्पद है, और वह इस पर जांच कर रहे हैं। हालांकि, यादव द्वारा आरोपित व्यक्ति का बयान अभी तक नहीं लिया गया है, और इसके लिए पुलिस उन्हें कई बार चौकी बुला चुकी है, लेकिन वह नहीं पहुंचे।
सावित्री बाई के आरोपों के बारे में भी मनोज पटेल ने कहा कि उनके पति और बेटे के खिलाफ पहले से ही मारपीट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका बेटा फरार है और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। ऐसे में पुलिस चौकी प्रभारी का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे हैं और उन्हें बदनाम करने के लिए एक साजिश की जा रही है।
जांच का आश्वासन और आगे की प्रक्रिया
एसपी कार्यालय में की गई शिकायत पर, एसपी ने मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है। यह आश्वासन इस बात का संकेत है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या आरोपितों पर सही तरीके से कार्रवाई की जा रही है या अगर यह केवल एक ढ़ोंग है।

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ है कि यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप सही हैं, तो यह सागर जिले की पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार और निष्क्रियता का गंभीर प्रमाण है। अगर पुलिस चौकी प्रभारी और अन्य संबंधित अधिकारियों पर लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल उठाएगा और स्थानीय जनता का पुलिस से विश्वास और भी कम हो जाएगा।
यह घटना न केवल पुलिस के भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे कमजोर और गरीब वर्ग के लोगों को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यह मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करती है, ताकि पुलिस की कार्यप्रणाली को सुधारा जा सके और आम जनता का विश्वास फिर से बहाल हो सके।
यहां पर सबसे अहम सवाल यह है कि क्या पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, या यह भी एक और असलियत को दबाने का प्रयास होगा?
व्यूरो रिपोर्ट – रिपब्लिक सागर मीडिया
संवाददाता – अर्पित सेन
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