सागर जिले के खिमलासा में गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर गोसेवकों और हिंदू संगठनों ने नारायणी मंदिर तिराहा पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गोचर भूमि पर लंबे समय से अतिक्रमण किया गया है, जिससे गौवंश के लिए चारे की भारी कमी हो रही है, लेकिन प्रशासन बार-बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।
गोसेवकों का कहना है कि अब तक 152 से अधिक आवेदन प्रशासन को सौंपे जा चुके हैं, फिर भी अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई पहल नहीं की गई, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
चारे की कमी से गौवंश पर संकट

गोसेवक हरकिशन सेन ने बताया कि गोचर भूमि पर कब्जे के कारण गायों के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चारे के अभाव में गायों की अकाल मृत्यु होती है या वे सड़कों पर भटकने के कारण दुर्घटनाओं का शिकार होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
उन्होंने कहा कि गोचर भूमि का संरक्षण न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
कई क्षेत्रों से पहुंचे प्रदर्शनकारी
इस आंदोलन में बीना, खुरई, मालथौन और कुरवाई सहित आसपास के कई इलाकों से गोसेवक, ग्रामीण और विभिन्न हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नारायणी मंदिर तिराहे पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मौके पर पहुंची पुलिस, प्रशासन से बातचीत
चक्काजाम की सूचना मिलते ही खिमलासा थाना प्रभारी राधेश्याम पटेल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला। इसके बाद उन्होंने खुरई एसडीएम मनोज चौरसिया से फोन पर चर्चा कर प्रदर्शनकारियों की मांगों से अवगत कराया।
एसडीएम के आश्वासन पर खुला जाम

खुरई एसडीएम मनोज चौरसिया ने गोसेवकों को आश्वासन दिया कि डेढ़ महीने के भीतर गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस अवधि में संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर सभी चिन्हित स्थानों पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के इस लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद गोसेवकों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और यातायात बहाल हो सका।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
प्रदर्शन के दौरान जीवन सिंह, नरेंद्र सिंह, रानू सिसोदिया, बृजेश दांगी, बाबा वजनदार और हरकिशन सेन सहित बड़ी संख्या में गोसेवक और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।