गो-हत्या, भूख से गोवंश की मौत और भूमि दुरुपयोग के लगाए आरोप
छतरपुर जिले में स्थित बुंदेलखंड गोशाला एक बार फिर विवादों में घिर गई है। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्राम मऊ सहानिया के ग्रामीणों ने आवेदन सौंपकर गोशाला के अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने गो-हत्या से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करने, मौजूदा गोशाला समिति को तत्काल भंग करने और नई समिति गठित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गोशाला के नाम पर शासन और दानदाताओं से मिलने वाली सुविधाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि गोवंश की हालत बेहद दयनीय है।
गोचर भूमि का खेती में इस्तेमाल करने का आरोप
आवेदन में बताया गया है कि बुंदेलखंड गोशाला ग्राम मऊ सहानिया में स्थित है, जिसके पास लगभग 84 एकड़ भूमि उपलब्ध है। यह भूमि मूल रूप से गौ-चराई के लिए आरक्षित है, लेकिन आरोप है कि गोशाला प्रबंधन इसका उपयोग खेती करने और अनाज बेचने के लिए कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरी भूमि का सही उपयोग गोचर के रूप में किया जाता, तो गोवंश को चारे की कमी नहीं होती और गायों की भूख से मौत जैसी घटनाएं सामने नहीं आतीं।
भूख से गोवंश की मौत के आरोप
ग्रामीणों ने दावा किया है कि गोशाला में कई गोवंश भूख और अव्यवस्था के कारण दम तोड़ चुके हैं। आरोप है कि चारा उपलब्ध होने के बावजूद उसे गोवंश तक नहीं पहुंचाया जाता, जिससे जानवर कुपोषण का शिकार हो रहे हैं।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पहले भी गोशाला प्रबंधन पर गोवंश को जहर देकर मारने और बड़ी संख्या में गायों की मौत के गंभीर आरोप लग चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
समिति भंग कर नई समिति बनाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौजूदा गोशाला समिति को तत्काल भंग कर स्थानीय, जिम्मेदार और संवेदनशील लोगों को शामिल करते हुए नई समिति बनाई जाए, ताकि गोवंश की उचित देखभाल सुनिश्चित हो सके।
साथ ही उन्होंने गोशाला अध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गौ-हत्या से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कर एफआईआर दर्ज करने की अपील की है।
अनुदान और दान का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी कि गोशाला को शासन से मिलने वाली अनुदान राशि, दानदाताओं से प्राप्त धन और उनके खर्च का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए। उनका कहना है कि पारदर्शिता के अभाव में भ्रष्टाचार और लापरवाही को बढ़ावा मिल रहा है।
इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने मांग की कि गोशाला में केवल दूध देने वाले पशुओं तक सीमित न रहकर, सभी गोवंश को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें बाहर सड़कों पर भटकने के लिए न छोड़ा जाए।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
जनसुनवाई में अधिकारियों ने ग्रामीणों का आवेदन स्वीकार करते हुए मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं कि आरोपों की सच्चाई सामने आ पाती है या नहीं और गोवंश की स्थिति में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।