RAC टिकट पर पूरा किराया गलत, आंशिक रिफंड के नियम बनाए रेलवे: संसदीय समिति !

Spread the love

नई दिल्ली।
रेल यात्रियों के हित में एक अहम सुझाव देते हुए संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) ने कहा है कि RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसलेशन) कैटेगरी के तहत बुक किए गए टिकटों पर यात्रियों से पूरा किराया वसूलना उचित नहीं है। समिति ने रेल मंत्रालय से मांग की है कि ऐसे यात्रियों को आंशिक किराया वापस करने के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं

RAC में बर्थ नहीं, फिर भी पूरा किराया क्यों?

मौजूदा नियमों के अनुसार, रेलवे RAC कैटेगरी में बुक किए गए टिकटों पर यात्रियों से पूरी बर्थ का किराया लेता है, जबकि यात्रा के दौरान यात्री को पूरी बर्थ नहीं मिलती। कई मामलों में दो RAC यात्री एक ही बर्थ साझा करते हैं, लेकिन दोनों से पूरा किराया वसूला जाता है।

PAC ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चार्ट बनने के बाद भी RAC यात्री बिना पूरी बर्थ सुविधा के यात्रा करता है, ऐसे में उससे पूरा किराया लेना अनुचित है।

संसद में पेश हुई PAC की रिपोर्ट

PAC ने बुधवार को संसद में अपनी रिपोर्ट ‘भारतीय रेलवे में ट्रेन संचालन में समय की पाबंदी और यात्रा का समय’ पेश की। रिपोर्ट में समिति ने रेलवे से आग्रह किया है कि RAC यात्रियों को आंशिक रिफंड दिया जाए और इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी समिति को दी जाए।


सुपरफास्ट ट्रेनों की परिभाषा पर भी सवाल

रिपोर्ट में समिति ने सुपरफास्ट ट्रेनों की कैटेगरी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। PAC का कहना है कि किसी ट्रेन को सुपरफास्ट मानने के लिए 55 किमी प्रति घंटे की औसत रफ्तार का मौजूदा बेंचमार्क बेहद कम और पुराना है।

2007 से नियमों में नहीं हुआ बदलाव

समिति ने बताया कि मई 2007 में रेलवे ने यह तय किया था कि—

  • ब्रॉड गेज पर 55 किमी/घंटा
  • मीटर गेज पर 45 किमी/घंटा

की औसत गति वाली ट्रेन को सुपरफास्ट माना जाएगा।
PAC ने कहा कि 2007 के बाद से इन मानदंडों में कोई बदलाव नहीं किया गया, जबकि तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा सुधार हुआ है।

478 में से 123 सुपरफास्ट ट्रेनें मानक से नीचे

ऑडिट के दौरान सामने आया कि देश में चल रही 478 सुपरफास्ट ट्रेनों में से 123 ट्रेनों की औसत गति 55 किमी प्रति घंटे से भी कम है, इसके बावजूद उनसे सुपरफास्ट चार्ज वसूला जा रहा है।


रेल मंत्रालय की सफाई

रेल मंत्रालय ने समिति को बताया कि जिन 123 ट्रेनों की गति कम पाई गई, उनमें से 47 ट्रेनों की मौजूदा स्पीड 55 किमी/घंटे से अधिक है।
बाकी ट्रेनों के बारे में मंत्रालय ने कहा कि रेगुलर ऑपरेशन शुरू होने के बाद अतिरिक्त स्टॉपेज देने की वजह से उनकी औसत गति प्रभावित हुई है।


PAC का सख्त रुख: ज्यादा किराया वसूलने का तरीका

PAC ने अपनी रिपोर्ट में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—
“समिति इस नतीजे पर पहुंचने के लिए मजबूर है कि कई ट्रेनों को सुपरफास्ट की श्रेणी में बनाए रखने का उद्देश्य ज्यादा किराया वसूलना था। जब किसी ट्रेन की स्पीड कम हो जाती है, तो उसे सुपरफास्ट कैटेगरी से हटाकर किराया संशोधित किया जाना चाहिए था।”


समिति के प्रमुख सुझाव

PAC ने रेलवे को कई अहम सुझाव दिए—

  • 55 किमी/घंटा का सुपरफास्ट बेंचमार्क पुराना और समय से पीछे है
  • चीन और जापान जैसे देशों में ट्रेनें कहीं ज्यादा रफ्तार से चलती हैं
  • सुपरफास्ट ट्रेनों के मानदंडों को ग्लोबल स्टैंडर्ड के करीब लाया जाए
  • सुपरफास्ट ट्रेनों की औसत गति करीब 100 किमी/घंटा तय की जाए
  • लक्ष्य यह हो कि 2030 तक ट्रेन पूरी यात्रा के दौरान 100 किमी/घंटा की रफ्तार बनाए रखे, न कि सिर्फ अंतिम स्टेशन तक पहुंचे
  • नई ट्रेनें शुरू करने के बजाय मौजूदा एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को समय पर चलाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाए

ब्रॉड गेज और मीटर गेज क्या होते हैं?

गेज का मतलब रेल की पटरियों के बीच की दूरी से है—

  • ब्रॉड गेज: 1.676 मीटर (भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल)
    • इसी पर एक्सप्रेस, सुपरफास्ट, राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत ट्रेनें चलती हैं
  • मीटर गेज: 1 मीटर
    • पहले पहाड़ी और छोटे रूट्स पर ज्यादा इस्तेमाल होता था
    • इसमें ट्रेनें धीमी और कम भार क्षमता वाली होती हैं

PAC में कितने सदस्य होते हैं?

पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (PAC) में कुल 22 सांसद होते हैं—

  • लोकसभा से 15
  • राज्यसभा से 7

PAC के अध्यक्ष का चयन लोकसभा स्पीकर करते हैं और परंपरा के अनुसार यह पद विपक्ष के सांसद को दिया जाता है।
कमेटी में वर्तमान में बीजेपी-एनडीए के 13 सदस्य शामिल हैं। PAC का काम केंद्र सरकार के खर्च और वित्तीय कामकाज की जांच करना होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *