शैलेन्द्र जैन ने राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी “सामाजिक अनुसंधान के विभिन्न आयाम” को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया !

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सागर। शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्ट महाविद्यालय, सागर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी “सामाजिक अनुसंधान के विभिन्न आयाम” में समाजसेवी और विशिष्ट अतिथि शैलेन्द्र जैन ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता कर कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने सामाजिक अनुसंधान के महत्व, इसके विभिन्न आयाम और समाज के विकास में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में पूर्व आईएएस श्रीकांत पांडे मुख्य वक्ता, डॉ. प्रमोद गुप्ता विषय विशेषज्ञ और प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत विषय प्रवर्तक के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने शोध प्रक्रिया, समाज पर इसके प्रभाव और नीतिनिर्माण में अनुसंधान के योगदान पर विस्तृत जानकारी साझा की।

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में जनभागीदारी समिति अध्यक्ष मनीषा विनय मिश्रा, अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे, प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि दुबे, डॉ. संजय खरे, विनय मिश्रा और डॉ. अंजना चतुर्वेदी सहित अनेक विद्वानजन उपस्थित रहे। सभी ने अपने अनुभव साझा करते हुए युवा प्रतिभाओं को शोध के प्रति प्रेरित किया और सामाजिक समस्याओं के समाधान में अनुसंधान की भूमिका को रेखांकित किया।

शैलेन्द्र जैन ने कहा कि सामाजिक अनुसंधान केवल अकादमिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज के सकारात्मक परिवर्तन, नीतिनिर्माण और विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित किया कि वे अपने अनुसंधान को समाज में व्यावहारिक रूप से लागू करने के तरीकों पर ध्यान दें। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे संगोष्ठी और अकादमिक पहलें युवा पीढ़ी में चिंतन, विश्लेषण और नवाचार की भावना को प्रज्वलित करती हैं।

प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी ने संगोष्ठी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि सामाजिक अनुसंधान से न केवल समाज की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है, बल्कि यह नीति निर्माताओं और समाजिक संगठनों के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करता है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि दुबे ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियाँ विद्यार्थियों को नए दृष्टिकोण अपनाने और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर गंभीर अध्ययन करने के लिए प्रेरित करती हैं।

विद्वानजन ने शोध के विभिन्न आयामों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि शोध केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में वास्तविक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि ऐसी संगोष्ठियाँ उनके ज्ञान और अनुसंधान क्षमता को बढ़ाती हैं। कार्यक्रम के अंत में शैलेन्द्र जैन सहित सभी अतिथियों ने युवाओं को प्रोत्साहित किया कि वे सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ें और समाज की समस्याओं के समाधान में योगदान दें।

इस प्रकार शासकीय स्वशासी कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्ट महाविद्यालय, सागर द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी “सामाजिक अनुसंधान के विभिन्न आयाम” युवा पीढ़ी को जागरूक करने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफल रही। यह आयोजन न केवल शोध की महत्ता को उजागर करता है, बल्कि विद्यार्थियों और विद्वानों के बीच संवाद, विचार-विमर्श और सीखने का अवसर भी प्रदान करता है।

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