सागर। मध्यप्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीराम कथा का समापन पूर्णाहुति सत्र के साथ हुआ। इस अवसर पर व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि श्रीरामचरितमानस में भगवान की संपूर्ण कथा समाहित है और मानस स्वयं कहता है कि भगवान की कथा केवल हरि कृपा से ही प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि कथा को प्रारंभ से अंत तक क्रमबद्ध रूप से पढ़ना और सुनना चाहिए, खंडित रूप में नहीं। जिस प्रकार कक्षा 2, 4 और 5 को छो़ड़कर सीधे मास्टर की पढ़ाई संभव नहीं है, उसी प्रकार रामकथा भी क्रम से ही जीवन में फल देती है।
पूज्य महाराज ने किष्किंधा कांड, सुंदरकांड, लंका कांड एवं श्रीराम राज्याभिषेक तक की कथा का भावपूर्ण गायन करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में अखंड रामायण का विशेष महत्व है। गृहस्थ जीवन में रहने वाले लोगों को भी नियमित और क्रमबद्ध रूप से मानस पाठ करना चाहिए। कथा भगवान की है, जो जीव की व्यथा का हरण कर देती है। प्रभु की कथा जितनी बार सुनी जाए, वह उतनी ही नई लगती है और मन को शांति प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य का मूल कर्तव्य सत्कर्म में लगे रहना है, लेकिन अधिकांश लोग मूल उद्देश्य को भूल जाते हैं। संसार की चिंता से पहले आत्मचिंतन आवश्यक है। भक्ति मार्ग पर बने रहने के लिए निरंतर भगवान की कथा का श्रवण आवश्यक है। केवल जगदीश में रमने से ही कल्याण संभव है।
पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि यदि भावपूर्वक भगवान की सेवा की जाए तो भगवान हमारे साथ ही रहते हैं, हमारे साथ भोजन करते हैं और वही भोग स्वीकार करते हैं। समस्या यह है कि मनुष्य भगवान को जीव भाव से सेवा नहीं करता। उन्होंने कहा कि भगवान को छोटी कटोरी में मिश्री चढ़ाकर स्वयं भोग-विलास करना विडंबना है।

महाराज श्री ने गूढ़ दार्शनिक भाव स्पष्ट करते हुए कहा कि हर वस्तु की अंतिम इच्छा अपने उद्गम में विलीन होने की होती है। जैसे जल नदियों के माध्यम से समुद्र में समाहित होता है, वैसे ही प्रत्येक जीव का अंतिम लक्ष्य परमात्मा में विलीन होना है। शरीर को ही स्वयं मान लेना सबसे बड़ी भूल है। शरीर तो आत्मा का माध्यम है, जो परमात्मा से मिलन के लिए धरती पर आती है।
उन्होंने कहा कि भगवान तक पहुंचने के लिए सद्गुरु का आश्रय आवश्यक है और किसी धाम तक पहुंचना भी केवल ईश्वर की कृपा से ही संभव होता है। गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी वर्ष में एक-दो बार किसी धाम की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।
पूज्य महाराज ने यह भी कहा कि मनुष्य अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी तो तय कर देता है, लेकिन अपने परमार्थ कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना नहीं बनाता। इस दौरान उन्होंने कई सुमधुर भजनों का गायन किया, जिन पर हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते रहे।

धर्म सेवा और प्रेम का मार्ग है: शिवराज सिंह चौहान
श्रीराम कथा के पूर्णाहुति सत्र में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप सेवा और प्रेम में निहित है। धर्म का महायज्ञ मानव को स्वार्थ से ऊपर उठकर भक्ति और सेवा के मार्ग पर ले जाता है। उन्होंने कहा कि परमपूज्य प्रेमभूषण जी महाराज का जीवन प्रेम, ज्ञान और भक्ति का अनुपम उदाहरण है।
श्री चौहान ने कहा कि सच्चा आनंद नेता बनने में नहीं, बल्कि सेवक बनने में है। उन्होंने ज्ञान, भक्ति और कर्म – तीनों मार्गों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म को जीवन का आधार बताया है। उन्होंने हनुमान जी और सीता-राम की कथा के माध्यम से प्रेम और भक्ति का संदेश दिया और कहा कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।

पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने किया आभार व्यक्त
आभार व्यक्त करते हुए पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि रुद्राक्ष धाम जागृत भूमि है। यहां 2014 में सात दिनों में 39 करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और रुद्राभिषेक हुआ था, जो अपने आप में अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष धाम में आज तक किसी भी कार्य के लिए चंदा नहीं लिया गया, जो भी हुआ वह ईश्वर की कृपा से हुआ।
उन्होंने कहा कि जब तक भारत में श्रीराम कथा है, तब तक भारत की संस्कृति और अस्तित्व सुरक्षित है।
श्रीराम कथा के अवसर पर केंद्रीय मंत्री, विधायक, पूर्व मंत्री, जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, समाजसेवी, संतगण और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर राष्ट्र, धर्म और संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया गया।