सागर जिले के रहली विकासखंड अंतर्गत पटना बुजुर्ग स्थित क्राइस्ट कॉन्वेंट स्कूल में कक्षा 9वीं के एक छात्र के साथ शिक्षक द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। घटना से आहत 14 वर्षीय छात्र अपने परिजनों के साथ रहली थाने पहुंचा और शिक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आवेदन लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
कक्षा में होमवर्क को लेकर हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित छात्र अभिजीत कक्षा 9वीं में अध्ययनरत है। वह शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे रोज की तरह स्कूल पहुंचा था। छात्र ने बताया कि दोपहर करीब 2:30 बजे शिक्षक शैलेंद्र चढ़ार कक्षा में पढ़ाने आए और सभी विद्यार्थियों से होमवर्क की कॉपियां दिखाने को कहा।
अभिजीत उस दिन अपनी होमवर्क कॉपी स्कूल नहीं ला सका था। उसने शिक्षक को बताया कि वह कॉपी गलती से अपने एक सहपाठी के घर भूल आया है। इसी बात से नाराज होकर शिक्षक ने कथित तौर पर उसे स्केल से हाथ और जांघ पर मारा, जिससे उसके शरीर पर चोट के निशान आ गए।
घर पहुंचकर मां को बताई आपबीती
स्कूल से छुट्टी के बाद छात्र ने घर पहुंचकर पूरी घटना अपनी मां को बताई। इसके बाद परिजन तुरंत सक्रिय हुए और छात्र को रहली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसका मेडिकल परीक्षण कर उपचार किया।
डॉक्टर ने की चोटों की पुष्टि
ड्यूटी डॉक्टर बसंत नेमा ने बताया कि 14 वर्षीय छात्र के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। बच्चे ने चिकित्सकों को बताया कि चोटें स्कूल में मारपीट के कारण आई हैं। प्राथमिक उपचार के बाद परिजन छात्र को लेकर रहली थाने पहुंचे और शिक्षक के खिलाफ शिकायती आवेदन सौंपा।
पुलिस और शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
रहली थाना पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। शनिवार को शिक्षा विभाग की टीम स्कूल जाकर पूरे प्रकरण की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बाल संरक्षण आयोग ने जताई चिंता

मामले पर बाल संरक्षण आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ने कहा कि छात्र के साथ मारपीट की शिकायत बेहद गंभीर है। किसी भी परिस्थिति में बच्चे को पीटना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस को निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अभिभावकों में आक्रोश
घटना के बाद क्षेत्र के अभिभावकों में भी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ शारीरिक दंड देना गलत है और स्कूल प्रबंधन को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।