
खंडवा (मध्य प्रदेश): छैगांवमाखन ग्राम पंचायत के कोंडावत गांव में गुरुवार को एक कुएं में जहरीली गैस के कारण 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। शुक्रवार सुबह मुक्तिधाम में एक साथ 8 चिताओं के जलने का दृश्य देखकर मौजूद लोगों ने अपने आंसुओं को नहीं रोक पाए। पिता को मुखाग्नि देते हुए एक बेटी का दुख देखकर सभी गमगीन हो गए।

खंडवा के कोंडावत गांव में शुक्रवार सुबह एक साथ 8 चिताएं जलीं तो मुक्तिधाम में मौजूद लोग अपने आंसू नहीं रोक सके। पिता को मुखाग्नि देने वाली बेटी का चेहरा देखकर सभी गमगीन हो गए। कोंडावत गांव के एक कुएं में जहरीली से दम घुटने के कारण गुरुवार को 8 लोगों की मौत हो गई थी। करीब 3 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शव कुएं से बाहर निकाले जा सके। सभी 8 शवों को जिला अस्पताल ले जाया गया। रात 12 बजे तक डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया। शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे सभी शवों को अलग-अलग वाहनों से गांव लाया गया। यहां अंतिम श्रद्धांजलि के बाद मुक्तिधाम ले जाया गया। अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों के लोग भी शामिल हुए। प्रशासन ने मृतकों के परिजन को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। एसडीएम बजरंग बहादुर ने कहा कि कुएं को तोड़कर मुरुम से भरा जाएगा।

गुरुवार शाम को गणगौर विसर्जन की तैयारी के दौरान अर्जुन पटेल नामक व्यक्ति कुएं की सफाई के लिए नीचे उतरा। अचानक कुएं में मौजूद जहरीली गैस (संभवतः हाइड्रोजन सल्फाइड या कार्बन मोनोऑक्साइड) के कारण वह बेहोश होकर दलदल में धंस गया। उसे बचाने के लिए एक के बाद एक 7 अन्य लोग कुएं में कूदे, लेकिन वे भी गैस की चपेट में आकर दम घुटने से मारे गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन और पोस्टमॉर्टम
घटना के बाद करीब 3 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में एसडीएम, पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर सभी 8 शवों को कुएं से निकाला। शवों को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां रात 12 बजे तक डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया।
अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़
शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे सभी शवों को अलग-अलग वाहनों से गांव लाया गया। परिजनों और ग्रामीणों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद शवों को मुक्तिधाम ले जाया गया। अंतिम संस्कार में आसपास के गांवों के सैकड़ों लोग शामिल हुए। एक साथ 8 चिताओं के जलने का दृश्य हृदयविदारक था।
प्रशासन की मदद और कुएं को भरने का निर्णय
प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। एसडीएम बजरंग बहादुर ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त कुएं को तोड़कर मुरुम (मिट्टी) से भर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो।
गांव में शोक की लहर
इस घटना से पूरा गांव सदमे में है। मृतकों में अधिकतर युवा और परिवार के मुखिया थे, जिससे कई परिवारों का एकमात्र सहारा चला गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से गहरे कुओं की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस त्रासदी ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की कमी और आपात स्थितियों में जागरूकता की आवश्यकता को उजागर किया है।

