छतरपुर रेलवे स्टेशन परिसर की पार्किंग में शनिवार को दबंगई और अवैध वसूली का गंभीर मामला सामने आया है। पार्किंग में खड़े एक बैटरी ऑटो चालक के साथ शराब के नशे में मारपीट की गई। पीड़ित चालक राशिद खान ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
दोबारा पैसे मांगने पर हुआ विवाद
पीड़ित राशिद खान के अनुसार, उसने सुबह रेलवे स्टेशन परिसर की पार्किंग में अपना बैटरी ऑटो खड़ा करने के बाद नियमानुसार पार्किंग शुल्क की रसीद कटवा ली थी। इसके बावजूद पार्किंग ठेकेदारों के साथ बैठने वाले कुछ लोगों ने उससे दोबारा पैसे मांगे।
जब राशिद ने पहले ही शुल्क देने की बात कहते हुए पैसे देने से इनकार किया और कारण पूछा, तो आरोपी भड़क गए। आरोप है कि नशे में धुत लोगों ने खुद को “पार्किंग का बाप” बताते हुए दबंगई दिखाई और गाली-गलौज शुरू कर दी।

लात-घूंसे और डंडों से पीटा
विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने राशिद खान के साथ लात-घूंसे और डंडों से बेरहमी से मारपीट की। उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। मारपीट में राशिद को चोटें आईं, जिसके बाद उसने थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।
रोजाना शराब पीकर करते हैं वसूली का आरोप
पीड़ित चालक का आरोप है कि ये लोग रोजाना रेलवे स्टेशन पार्किंग में बैठकर शराब पीते हैं और टैक्सी, ऑटो व अन्य वाहन चालकों से जबरन अवैध वसूली करते हैं। जो चालक पैसे देने से मना करता है, उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की जाती है।
रेलवे स्टेशन जैसी संवेदनशील और सार्वजनिक जगह पर इस तरह खुलेआम गुंडागर्दी होने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

डायल-112 की भूमिका पर भी सवाल
राशिद खान ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के समय पुलिस की डायल-112 गाड़ी मौके पर मौजूद थी। जब उसने उसमें बैठे पुलिसकर्मियों से मदद मांगी, तो उन्होंने मौके पर कार्रवाई करने के बजाय उसे थाने जाकर शिकायत करने को कह दिया।
इस घटना के बाद डायल-112 की कार्यप्रणाली और त्वरित पुलिस सहायता व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस ने शुरू की जांच
सिविल लाइन थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है, आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने न केवल रेलवे स्टेशन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि पार्किंग ठेके और अवैध वसूली को लेकर भी प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करती है।