बीना में शनिवार को एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के संयुक्त मोर्चे ने यूजीसी बिल के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान गांधी चौराहा से अंबेडकर तिराहा तक पैदल मार्च निकाला गया और राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार अंबर पंथी को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए।
गांधी चौराहा से शुरू हुआ मार्च
प्रदर्शन की शुरुआत गांधी चौराहा से हुई, जहां उपस्थित लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद हाथों में तख्तियां और झंडे लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए कॉलेज तिराहा और सर्वोदय चौराहा से गुजरते हुए अंबेडकर तिराहा पहुंचे।
मार्च के दौरान यूजीसी बिल के समर्थन में नारे लगाए गए और सामाजिक न्याय, समान अवसर व शिक्षा में समानता की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।

अंबेडकर तिराहा पर दिया एकता का संदेश
अंबेडकर तिराहा पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचारों पर चलते हुए शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करना जरूरी है और यूजीसी के नए नियम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
कार्यक्रम के दौरान एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की एकता को मजबूती देने का संदेश भी दिया गया।

चुनावों में विरोध की चेतावनी
इस मौके पर ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय महासचिव विजेंद्र सिंह यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि यूजीसी के नए नियमों को पारित नहीं किया गया, तो आने वाले चुनावों में उन सभी लोगों और ताकतों का विरोध किया जाएगा जो इन नियमों की राह में रोड़ा अटका रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय और भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है।

तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
पैदल मार्च के समापन पर संयुक्त मोर्चे के प्रतिनिधियों ने तहसीलदार अंबर पंथी से मुलाकात की और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूजीसी बिल को जल्द से जल्द लागू करने और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इस दौरान बड़ी संख्या में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें उठी मांगों और चेतावनियों ने राजनीतिक हलकों में हलचल जरूर पैदा कर दी है।