सागर (मध्य प्रदेश)। सागर जिले के ग्राम मंडला जूना मौजा में नरवाई जलाने की लापरवाही के कारण भड़की आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे आसपास के खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई। करीब 20 एकड़ क्षेत्र में फैली फसल को आग ने अपनी चपेट में ले लिया, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

कैसे भड़की आग?
जानकारी के अनुसार, एक किसान ने मूंग की बुआई के लिए अपने खेत में नरवाई (फसल अवशेष) जलाई। हालांकि, तेज हवा के कारण आग बेकाबू होकर पड़ोसी खेतों में फैल गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसानों द्वारा किए गए प्रयासों के बावजूद इसे तुरंत नियंत्रित नहीं किया जा सका।
किसानों और फायर ब्रिगेड की मशक्कत
आग की सूचना मिलते ही स्थानीय किसान मौके पर पहुंचे और ट्रैक्टरों से जुताई करके आग पर काबू पाने की कोशिश की। इसके अलावा, पेड़ों की टहनियों से आग बुझाने का प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया, जिसने करीब 4 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग पर नियंत्रण पाया।

किसानों को भारी नुकसान
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग की चपेट में आकर न केवल गेहूं की फसल बल्कि खेतों में रखे करीब 100 पाइप भी जलकर खाक हो गए। एक प्रभावित किसान ने बताया, “गर्मियों में नरवाई जलाने से ऐसी घटनाएं हर साल होती हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।”
मुआवजे की मांग
पीड़ित किसानों ने प्रशासन से आगजनी में हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों से नरवाई न जलाने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

प्रशासन की भूमिका
स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और किसानों के नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे फसल अवशेष प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करें, न कि आग लगाकर।
इस घटना ने एक बार फिर कृषि क्षेत्र में सुरक्षा उपायों की कमी और किसानों के प्रति जागरूकता की आवश्यकता को उजागर किया है। प्रशासन को चाहिए कि वह किसानों को नरवाई जलाने के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करे और ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सख्त नियम बनाए।
ब्यूरो रिपोर्ट – रिपब्लिक सागर मीडिया
संवाददाता – अर्पित सेन
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