सागर जिले के प्रसिद्ध लोक कलाकार और पद्मश्री से सम्मानित राम सहाय पांडे का मंगलवार को निधन हो गया। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका निधन बुंदेलखंड और पूरे भारत के कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे, और सोमवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

लोक कला राई के प्रमोटर: एक अद्वितीय व्यक्तित्व
राम सहाय पांडे ने अपनी पूरी जिंदगी बुंदेली लोक कला ‘राई’ को दुनिया भर में पहचान दिलाने के लिए समर्पित कर दी थी। ‘राई’ नृत्य के प्रति उनके समर्पण ने इस पारंपरिक कला को न केवल बुंदेलखंड, बल्कि पूरे देश में एक नई पहचान दिलाई थी। 2022 में, भारत सरकार ने उन्हें उनके अद्वितीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके द्वारा बुंदेली लोक नृत्य राई को लोकप्रिय बनाने की दिशा में किए गए अथक प्रयासों का प्रतीक था।

राम सहाय पांडे का योगदान सिर्फ उनके नृत्य कला तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अपनी संस्कृति, धरोहर और कला को संजीवनी दी थी। उनका जीवन और कार्य कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। उनकी कला न केवल भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य धरोहर बन गई, बल्कि उन्होंने अपनी कला के माध्यम से भारतीय लोक कलाओं को एक वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया।
नेताओं का शोक संदेश और श्रद्धांजलि
पद्मश्री राम सहाय पांडे के निधन की खबर ने हर किसी को गहरे शोक में डाल दिया। सागर सांसद लता वानखेड़े ने उन्हें याद करते हुए कहा, “बुंदेलखंड की लोक कला ‘राई’ को वैश्विक मंच पर पहुँचाने वाले पद्मश्री राम सहाय पांडे जी का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति दे।”

मध्य प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा, “पद्मश्री राम सहाय पांडे को वर्ष 2022 में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट सेवा के लिए पद्म पुरस्कारों की श्रृंखला में तीसरा सर्वोच्च पुरस्कार पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार बुंदेली लोक नृत्य राई को लोकप्रिय बनाने के लिए दिया गया था।”

पूर्व मंत्री और रहली विधायक गोपाल भार्गव ने कहा, “बुंदेलखंड की शान, लोक कला ‘राई’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले पद्मश्री श्री राम सहाय पांडे जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं उनके प्रति अपनी गहरी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दिवंगत आत्मा को शांति तथा परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”

सागर विधायक शैलेन्द्र जैन ने भी अपने शोक संदेश में कहा, “मेरे पारिवारिक सदस्य, लोक कला ‘राई’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले, बुंदेलखंड के गौरव, पद्मश्री श्री राम सहाय पांडे जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दे तथा परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।”

कला और संस्कृति के प्रति समर्पण
राम सहाय पांडे का जीवन एक प्रेरणा था। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल बुंदेली संस्कृति को संजीवनी दी, बल्कि भारतीय लोक कला को विश्वभर में सम्मान दिलाया। उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। राई नृत्य की मौलिकता और सांस्कृतिक महत्व को जीवित रखने के लिए उनका समर्पण और संघर्ष हमेशा याद किया जाएगा।
उनका निधन केवल एक महान कलाकार की विदाई नहीं है, बल्कि यह पूरे बुंदेलखंड और भारतीय संस्कृति के लिए एक गहरा शोक है। उनकी कला के माध्यम से बुंदेली लोक नृत्य राई को जो पहचान मिली थी, वह अनमोल है। यह कला अब एक नई पीढ़ी के लिए भी एक धरोहर के रूप में जीवित रहेगी।

अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि
पद्मश्री राम सहाय पांडे का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गाँव कनेरा देव में किया जाएगा। उनके परिवार, दोस्तों, और प्रशंसकों के लिए यह एक दुखद समय है, लेकिन उनकी कला और उनके द्वारा छोड़ी गई धरोहर सदैव जीवित रहेगी। सभी ने उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की और उनके परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति देने की कामना की।
रिपब्लिक सागर मीडिया की पूरी टीम इस दुःख की घडी में उनके पूरे परिवार के साथ खडी है, और ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ब्यूरो रिपोर्ट, रिपब्लिक सागर मीडिया
संवाददाता – अर्पित सेन
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