बेहतर रिटर्न की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए ICL फिनकॉर्प का नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) इश्यू आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 5 फरवरी को खुला यह पब्लिक इश्यू 18 फरवरी तक निवेश के लिए खुला रहेगा।
13 फरवरी दोपहर 12 बजे तक यह इश्यू कुल 1.74 गुना सब्सक्राइब हो चुका है, जो निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है। कंपनी इस इश्यू में सालाना अधिकतम 12.25% तक ब्याज की पेशकश कर रही है।
HNI सेगमेंट में जबरदस्त मांग
सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के अनुसार:
- हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) कैटेगरी: 3.72 गुना सब्सक्राइब
- नॉन-इंस्टीट्यूशनल कैटेगरी: 2.02 गुना
- रिटेल कैटेगरी: 0.95 गुना

इन आंकड़ों से साफ है कि बड़े निवेशकों के साथ-साथ रिटेल निवेशकों ने भी अच्छा रिस्पॉन्स दिया है।
निवेश विकल्प और ब्याज दरें
कंपनी ने 13, 24, 36, 60 और 72 महीने की अवधि के कुल 10 विकल्प पेश किए हैं। ब्याज दरें 10% से 12.25% के बीच तय की गई हैं।
निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, वार्षिक या मैच्योरिटी पर ब्याज लेने का विकल्प चुन सकते हैं। न्यूनतम निवेश राशि ₹10,000 निर्धारित की गई है। आवेदन के लिए एक्टिव डीमैट अकाउंट अनिवार्य है।
निवेश से पहले समझें 3 अहम बातें
1. रिटर्न:
जहां सामान्य बैंक एफडी 7–8% तक रिटर्न देती हैं, वहीं इस NCD में 12.25% तक ब्याज का ऑफर है।
2. जोखिम (रेटिंग):
इश्यू को क्रिसिल द्वारा BBB- / स्टेबल रेटिंग दी गई है। यह मध्यम स्तर की सुरक्षा को दर्शाता है और निवेशकों को संभावित जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।
3. अवधि:
निवेशक अपनी वित्तीय योजना के अनुसार 13 महीने से लेकर 6 साल तक की अवधि चुन सकते हैं।

रेटिंग का क्या मतलब?
यह एक सिक्योर्ड NCD है, यानी कंपनी की संपत्तियों का बैकअप इसमें शामिल है। हालांकि BBB- रेटिंग को निवेश योग्य श्रेणी की निचली सीमा माना जाता है। इसका अर्थ है कि कंपनी के पास अपने वित्तीय दायित्वों (ब्याज और मूलधन भुगतान) को पूरा करने की मध्यम क्षमता है।
‘स्टेबल’ आउटलुक यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में कंपनी की वित्तीय स्थिति में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
कंपनी प्रोफाइल
करीब 34 वर्षों से वित्तीय क्षेत्र में सक्रिय ICL फिनकॉर्प, एडवोकेट के.जी. अनिलकुमार के नेतृत्व में केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली सहित 11 राज्यों में कारोबार कर रही है।
कंपनी मुख्य रूप से गोल्ड लोन, बिजनेस लोन और हायर परचेज लोन प्रदान करती है। समूह की एक अन्य कंपनी ‘सेलम ईरोड इन्वेस्टमेंट्स’ बीएसई पर सूचीबद्ध है।
जुटाई गई राशि का उपयोग
कंपनी इस इश्यू से जुटाई गई पूंजी का उपयोग अपने कारोबार के विस्तार और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में करेगी। साथ ही देशभर में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की योजना है।
क्या होता है NCD?
NCD यानी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर एक ऋण साधन (Debt Instrument) है। इसमें निवेशक कंपनी को पैसा उधार देता है और कंपनी तय ब्याज दर पर रिटर्न देती है। इसे शेयर में परिवर्तित नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे ‘नॉन-कन्वर्टिबल’ कहा जाता है।
रिटर्न पहले से तय होने के कारण इसमें शेयर बाजार की तुलना में कम उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता।
निवेश से पहले सलाह:
उच्च रिटर्न के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।