सागर, 10 अप्रैल — जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का 2624वां जन्मकल्याणक महोत्सव गुरुवार को सागर शहर में धार्मिक श्रद्धा, सामाजिक समरसता और स्वच्छता के संकल्प के साथ भव्य रूप से मनाया गया। इस पावन अवसर पर जैन समाज की ओर से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जो धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बनी। यह शोभायात्रा पिछले 82 वर्षों से सागर में निरंतर निकल रही है, और इस वर्ष की यात्रा भी पहले से कहीं अधिक उल्लास और भक्ति के रंग में रंगी रही।

शोभायात्रा की भव्य शुरुआत और मार्ग
शोभायात्रा की शुरुआत कटरा स्थित गौराबाई जैन मंदिर से हुई। यात्रा का मार्ग शहर के प्रमुख स्थानों—कीर्ति स्तंभ, लच्छू चौराहा, वर्णी कॉलोनी, गुजराती बाजार, लिंक रोड, विजय टाकीज, मस्जिद, कटरा बाजार, तीनबत्ती, कोतवाली, सराफा, इतवारा बाजार और मोराजी—से होकर पुनः गौराबाई मंदिर में समाप्त हुआ। इस पूरे मार्ग पर श्रद्धालु और स्थानीय लोग भारी संख्या में मौजूद रहे और जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।
आकर्षक झांकियों ने मोहा मन
इस धार्मिक शोभायात्रा में जैन समाज के विभिन्न मंदिरों द्वारा आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। मोक्ष कल्याणक, भगवान श्रीकृष्ण, जैन तीर्थस्थल और प्राचीन जैन परंपराओं को दर्शाने वाली झांकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। झांकियों के माध्यम से समाज ने धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ अहिंसा, जैविक खेती और सद्भावना का भी संदेश दिया।
ड्रेस कोड में सजी महिला मंडल, बालक-बालिकाओं के समूह, दिव्य घोष और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।

धार्मिकता के साथ सामाजिक सरोकार
इस वर्ष की शोभायात्रा विशेष रही क्योंकि इसमें केवल धार्मिकता ही नहीं, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के भी संदेश को प्रमुखता दी गई। यात्रा के आगे शोभायात्रा चल रही थी तो पीछे समाज के युवा सफाई करते हुए आगे बढ़ रहे थे। सफाई अभियान में विशेष रूप से ध्यान रखा गया कि किसी भी स्थान पर गंदगी न फैले।
स्थानीय विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने भी इस पुण्य अवसर पर भाग लिया और अपने हाथों में झाड़ू लेकर सड़क की सफाई करते हुए स्वच्छता का संदेश दिया। यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गई।

मुनिसंघ के प्रवचनों ने दी आध्यात्मिक दिशा
शोभायात्रा के समापन के पश्चात गौराबाई जैन मंदिर में मुनिसंघ द्वारा मंगल प्रवचन आयोजित किए गए। प्रवचनों में भगवान महावीर के जीवन सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—की महत्ता को विस्तार से समझाया गया। श्रद्धालुओं ने इन उपदेशों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
सार्वजनिक सहयोग और समरसता का प्रतीक
इस आयोजन ने धार्मिक सौहार्द और सामूहिकता की मिसाल पेश की। नगर प्रशासन, स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों का इस आयोजन में भरपूर सहयोग रहा। नगर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा और व्यवस्था में कोई विघ्न न आए इसका विशेष ध्यान रखा गया।

भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक सामाजिक अभियान बन चुका है—जहां धर्म, सेवा, स्वच्छता और सद्भाव एक साथ चलते हैं। सागर शहर की यह परंपरा आने वाले वर्षों में और भी व्यापक स्वरूप ले, यही सभी श्रद्धालुओं की कामना रही।
— व्यूरो रिपोर्ट, रिपब्लिक सागर मीडिया
संवाददाता – अर्पित सेन
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