असम दौरे पर पीएम मोदी: मोरन हाईवे पर विमान उतार रचा इतिहास, कांग्रेस पर साधा निशाना !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को असम दौरे पर पहुंचे। गुवाहाटी में जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश को खतरे में डालकर रखा और जब भी सेना के लिए हथियार खरीदे, तब हजारों करोड़ रुपये के घोटाले सामने आए।

पीएम ने कहा कि आज की कांग्रेस ऐसे लोगों और विचारों का समर्थन कर रही है जो देश के खिलाफ सोचते हैं। जो लोग देश तोड़ने की बात करते हैं या ऐसे नारे लगाते हैं, वे कांग्रेस के लिए सम्मानित बन गए हैं।

मोरन बाइपास पर विमान उतारने वाले पहले प्रधानमंत्री

पीएम पहले चाबुआ एयरफील्ड पहुंचे, जहां से वायुसेना के सी-130 विमान से डिब्रूगढ़ के मोरन बाइपास पहुंचे। यहां राष्ट्रीय राजमार्ग-127 के 4.4 किलोमीटर लंबे हिस्से पर बनी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर विमान उतारा गया। ऐसा करने वाले वे पहले प्रधानमंत्री बने।

यह इलाका चीन सीमा से लगभग 300 किलोमीटर दूर है, जिससे इसका सामरिक महत्व और बढ़ जाता है। पीएम की मौजूदगी में राफेल और सुखोई समेत 16 लड़ाकू विमानों ने हाईवे पर लैंडिंग और टेक-ऑफ का प्रदर्शन किया। यह हवाई प्रदर्शन करीब 30 मिनट तक चला।

भाषण की प्रमुख बातें

कांग्रेस शासन में असम को टैक्स हिस्से के रूप में केवल 10 हजार करोड़ रुपये मिलते थे, जबकि भाजपा सरकार में यह राशि पांच गुना बढ़ी है।

कभी नॉर्थ ईस्ट में खराब सड़कों की चर्चा होती थी, आज हाईवे पर हवाई जहाज उतर रहे हैं।

भाजपा सरकार ने 10 वर्षों में ब्रह्मपुत्र पर 5 बड़े पुल बनाए, जबकि कांग्रेस के 70 वर्षों में 3 पुल बने।

वंदे भारत ट्रेन और अन्य नई परियोजनाओं का लाभ सबसे पहले नॉर्थ ईस्ट को मिला।

असम में लाखों परिवारों को घर, शौचालय और नल से जल की सुविधा मिली।

महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन

पीएम मोदी ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मन सेतु और भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) गुवाहाटी के अस्थायी परिसर का उद्घाटन भी किया। यह पिछले तीन महीनों में उनका तीसरा असम दौरा है। राज्य में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। 2016 से लगातार दो बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार असम में बनी है।

पूर्वोत्तर की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी

मोरन एयरस्ट्रिप देश की पहली ऐसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है, जिसे सेना और नागरिक दोनों प्रकार के विमान उपयोग कर सकते हैं। ‘डुअल-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर’ की अवधारणा पर बनी यह सुविधा 40 टन तक के लड़ाकू विमान और 74 टन तक के अधिकतम टेक-ऑफ वजन वाले परिवहन विमानों को संभालने में सक्षम है।

आपातकाल या युद्ध जैसी स्थिति में हाईवे को अस्थायी हवाई पट्टी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे रणनीतिक दृष्टि से क्षेत्र की मजबूती बढ़ेगी और उत्तर-पूर्व में बुनियादी ढांचे के विकास को नई दिशा मिलेगी।

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