बीना, 23 अप्रैल 2025 – न्याय की मांग को लेकर आज बीना की सड़कें गूंज उठीं। नौगांव में नाबालिग भाई-बहन पर हुए जघन्य हमले के विरोध में कुशवाहा समाज ने मंगलवार को बड़ा प्रदर्शन किया। सैकड़ों लोगों ने अंबेडकर तिराहे से तहसील तक पैदल मार्च निकालकर आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

“बीना की बेटी को न्याय दो!” – जनता का आक्रोश सड़कों पर
प्रदर्शनकारियों के हाथों में “बीना की बेटी को न्याय दो”, “रागिनी को इंसाफ दिलाओ” और “राजनीतिक संरक्षण में गुंडागर्दी बंद करो” जैसी तख्तियां थीं। आक्रोशित समुदाय के लोगों ने तहसील पहुंचकर धरना दिया और प्रशासन के सामने ज्ञापन सौंपा।
समाज के अध्यक्ष महेश कुशवाहा ने आरोप लगाया – “भाजपा नेता संतोष ठाकुर और उनके परिजनों ने राजनीतिक रसूख का दुरुपयोग कर नौगांव में आतंक फैला रखा है। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से गांव के लोग डरे हुए हैं।”
प्रदर्शन में पीड़ित बच्चों के माता-पिता भी मौजूद थे, जिनकी आंखों में डर और गुस्सा साफ झलक रहा था। एक रिश्तेदार ने बताया – “हमारे बच्चे अभी मासूम उम्र के हैं। उन पर हमला करने वालों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन आरोपी अभी तक खुले घूम रहे हैं!”

कौन हैं आरोपी?
प्रदर्शनकारियों ने पांच लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की, जिनमें शामिल हैं:
- संतोष ठाकुर (भाजपा नेता)
- हरिसिंह ठाकुर
- भूरा ठाकुर
- किट्टू ठाकुर
- गोलू ठाकुर
अधिवक्ता हरिनारायण कुशवाहा ने ज्ञापन पढ़ते हुए कहा – “यह मामला सिर्फ हमला नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्ग को डराने की साजिश है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो हम और बड़ा आंदोलन करेंगे।”
विधायक ने दिया आश्वासन, लेकिन कब मिलेगा इंसाफ?
प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विधायक निर्मला सप्रे से भी मुलाकात की। विधायक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा – “पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कार्रवाई की जाएगी। पुलिस तेजी से जांच कर रही है।”
हालांकि, समाज के युवाओं का सवाल है – “क्या सिर्फ आश्वासन से काम चलेगा? जब तक आरोपी जेल नहीं जाते, हम चैन से नहीं बैठेंगे!”

समाज की चेतावनी: “अब हद हो चुकी है!”
कुशवाहा समाज ने साफ कर दिया है कि अगर आरोपियों के खिलाफ 48 घंटे के अंदर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बंद और जिला कलेक्ट्रेट घेराव जैसे आंदोलनों का रास्ता अपनाएंगे।
एक बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने कड़क स्वर में कहा – “हम दबाव नहीं बना रहे, बल्कि अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर कानून नहीं सुनेंगा, तो सड़कें ही न्याय दिलाएंगी!”
निष्कर्ष: अब क्या?
- पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं।
- प्रशासन के सामने अब सख्त कार्रवाई का दबाव है।
- अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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