बीना के शासकीय कन्या महाविद्यालय में एनएसएस शिविर का दूसरा दिन आयोजित !

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शासकीय कन्या महाविद्यालय, बीना की एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित 7 दिवसीय विशेष शिविर के दूसरे दिन गुरुवार को विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रभारी मृणालिनी मिश्रा के नेतृत्व में स्वयंसेविकाओं ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ सहभागिता निभाई।

🌅 राष्ट्रभक्ति और योग से हुई दिन की शुरुआत

शिविर के दूसरे दिन की शुरुआत एनएसएस गीत और राष्ट्रीय एकता की शपथ के साथ हुई। इसके पश्चात स्वयंसेविकाओं ने सामूहिक योगाभ्यास किया, जिसमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर बल दिया गया। योग सत्र के दौरान अनुशासन और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखा गया।

🚶‍♀️ प्रभात फेरी निकालकर किया जन-जागरूकता अभियान

योगाभ्यास के बाद स्वयंसेविकाओं ने गांव में प्रभात फेरी निकाली। जन-जागरूकता गीतों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीणों को सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक किया। स्वयंसेविकाएं घर-घर पहुंचीं और शुक्रवार को आयोजित होने वाले निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर की जानकारी दी। ग्रामीणों ने छात्राओं की इस पहल की सराहना की।

🗣️ बौद्धिक सत्र में शिक्षा और चरित्र निर्माण पर जोर

प्रभात फेरी के उपरांत बौद्धिक चर्चा सत्र आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शासकीय विधि महाविद्यालय, बीना के प्रभारी प्राचार्य आनंद प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि पूर्वाग्रहों को तोड़कर समाजोपयोगी व्यक्तित्व का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि एक आदर्श विद्यार्थी ही आगे चलकर एक श्रेष्ठ शिक्षक और जिम्मेदार नागरिक बनता है।

विशिष्ट अतिथि सहायक प्राध्यापक प्रगति सिंह ने एनएसएस शिविर को चरित्र निर्माण की प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि ऐसे शिविर विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं।

🎯 व्यावहारिक ज्ञान का महत्व

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रश्मि जैन ने खो-खो खेल का उदाहरण देकर समझाया कि जीवन में केवल पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जैसे खेल में फुर्ती, रणनीति और टीमवर्क आवश्यक है, वैसे ही जीवन में व्यावहारिक अनुभव, धैर्य और सामंजस्य का महत्व अधिक है।

🤝 आयोजन में सहयोग

कार्यक्रम के सफल संचालन में शिविर सहयोगी डॉ. निशी भदौरिया का मार्गदर्शन रहा। वहीं व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संभालने में विनोद, विकास और पूजा की सक्रिय भूमिका रही। स्वयंसेविकाओं ने पूरे दिन अनुशासन और समर्पण के साथ शिविर गतिविधियों में भाग लिया।

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