मध्य प्रदेश के जबलपुर में 67 वर्षीय राजाराम विश्वकर्मा पर हुए प्राणघातक हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों में से दो को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अब भी फरार हैं। यह सनसनीखेज वारदात 18 फरवरी की शाम लार्डगंज थाना क्षेत्र के गोल बाजार इलाके में हुई थी। घटना के बाद से ही पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी।
घटना कैसे हुई?
राजाराम विश्वकर्मा एक निजी अस्पताल में कारपेंटर का काम करते हैं और चेरीताल इलाके में परिवार के साथ रहते हैं। 18 फरवरी को उन्हें एक फोन कॉल आया, जिसमें ठेला (हाथगाड़ी) बनाने का ऑर्डर देने की बात कही गई। कॉल करने वाले ने खुद को ग्राहक बताते हुए गोल बाजार बुलाया और एडवांस देने की बात भी कही। काम की उम्मीद में जब राजाराम अस्पताल से बाहर पहुंचे, तभी पहले से घात लगाए बदमाशों ने उन्हें घेर लिया।

मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल ने अपने साथियों विकास उर्फ विक्की तिवारी, शनि रजक और महेंद्र पटले के साथ मिलकर बुजुर्ग पर लाठी, लोहे की रॉड और लात-घूंसों से हमला कर दिया। हमलावर तब तक मारपीट करते रहे जब तक राजाराम बेहोश नहीं हो गए। इसके बाद सभी आरोपी बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गए। इस हमले में राजाराम के दोनों पैरों, एक हाथ और गले में फ्रैक्चर हुआ है। उनकी हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हमले की वजह क्या थी?
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हमले की जड़ में पुराना विवाद था। राजाराम के बेटे संदीप विश्वकर्मा का करीब डेढ़ महीने पहले पड़ोसी शुभम जायसवाल से विवाद हुआ था। आरोप है कि शुभम अपने दोस्तों के साथ सड़क पर शराब पीकर तेज आवाज में बातचीत कर रहा था। संदीप ने इसका विरोध करते हुए उन्हें डांट दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और शुभम ने बदला लेने की धमकी दी थी।
इसके बाद से आरोपी संदीप को नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे। 14 जनवरी को उन्होंने संदीप के घर के बाहर पटाखे फोड़े और गाली-गलौज की। हालांकि पड़ोसियों के इकट्ठा होने पर वे भाग निकले। पुलिस का मानना है कि जब उन्हें सीधे संदीप को निशाना बनाने का मौका नहीं मिला, तो उन्होंने उसके पिता को टारगेट कर बदला लिया।

पुलिस की कार्रवाई
लार्डगंज थाना पुलिस और सीएसपी रितेश कुमार शिव के नेतृत्व में टीम आरोपियों की तलाश में जुटी थी। सोमवार देर रात पुलिस को सूचना मिली कि विकास उर्फ विक्की तिवारी और शनि रजक चेरीताल इलाके में घूम रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि भागने की कोशिश में दोनों के पैरों में चोट भी आई है।
हालांकि मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल और महेंद्र पटले अब भी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है और संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
समाज में आक्रोश
इस घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिनदहाड़े या सार्वजनिक स्थान पर इस तरह एक बुजुर्ग पर हमला होना गंभीर चिंता का विषय है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमले के दौरान कई लोग वहां से गुजर रहे थे, लेकिन कोई भी बीच-बचाव के लिए आगे नहीं आया। यह सामाजिक संवेदनहीनता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

कानूनी धाराएं और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307), मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है, जिससे फरार साथियों की जानकारी मिल सके। पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी पकड़ लिया जाएगा।

निष्कर्ष
यह मामला केवल आपसी विवाद का परिणाम नहीं, बल्कि छोटी-सी कहासुनी के बाद बदले की भावना में की गई गंभीर आपराधिक साजिश का उदाहरण है। एक बुजुर्ग को निशाना बनाना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि समाज में भय का माहौल भी पैदा करता है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई जारी है और पूरे शहर की नजर इस मामले में होने वाली आगे की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी है।