कृषक कल्याण वर्ष’ से बदलेगी खेती की तस्वीर, 1.15 लाख करोड़ का प्रावधान ऐतिहासिक !

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पूर्व गृह मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक Bhupendra Singh ने कहा है कि Dr. Mohan Yadav के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने “समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के लाखों किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया।

1.15 लाख करोड़ का प्रावधान, किसान सर्वोच्च प्राथमिकता

श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2026 के लिए कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों में लगभग 1.15 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार की प्राथमिकता में किसान सर्वोच्च स्थान पर हैं। उन्होंने कहा कि यह बजटीय प्रावधान केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, खेती को आधुनिक बनाने और कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक किसानों के कल्याण से जुड़ी पाँच प्रमुख योजनाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे योजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी और किसानों को दीर्घकालिक एवं स्थिर लाभ मिल सकेगा। उन्होंने इसे सरकार की दूरगामी और योजनाबद्ध सोच का परिचायक बताया।

“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” से जल संरक्षण को बढ़ावा

वरिष्ठ विधायक ने कहा कि “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के लिए 2,393.97 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि जल संरक्षण और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को बढ़ावा देने में सहायक होगी। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों को अपनाने से पानी की बचत होगी, खेती की लागत घटेगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि जल संकट की चुनौती को देखते हुए यह योजना भविष्य की खेती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव होगा और किसानों की आय में प्रत्यक्ष वृद्धि होगी।

दलहन उत्पादन को मिलेगा प्रोत्साहन

श्री सिंह ने उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा को दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने वाला बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे किसान दलहन फसलों की ओर अधिक आकर्षित होंगे, जिससे प्रदेश में दाल उत्पादन बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी।

उन्होंने कहा कि भावांतर योजना के तहत सरसों की खरीदी तथा चना और मसूर जैसी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद किसानों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करेगी। बाजार में मूल्य गिरावट की स्थिति में अंतर की भरपाई होने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और जोखिम कम होगा।

सोलर पंप योजना से आत्मनिर्भर खेती

श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि सोलर पंप वितरण योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए क्रांतिकारी कदम साबित होगी। लगभग एक लाख किसानों को सौर ऊर्जा आधारित पंप उपलब्ध कराने की योजना से बिजली बिल में कमी आएगी और डीजल पर निर्भरता घटेगी। इससे किसानों की लागत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर और टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सौर ऊर्जा के उपयोग से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती पर जोर

वरिष्ठ विधायक ने कहा कि सरकार फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, मिट्टी परीक्षण शिविर और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।

उन्होंने बताया कि दलहन, तिलहन, सब्जी और बागवानी को प्रोत्साहन देकर सरकार किसानों की आय के नए स्रोत विकसित कर रही है। इससे पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैकल्पिक आय के अवसर भी बढ़ेंगे और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगे।

पशुपालन और डेयरी विकास को बढ़ावा

श्री सिंह ने कहा कि गौशालाओं के आधुनिकीकरण एवं डेयरी विकास के लिए लगभग 2,364 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने से किसानों की अतिरिक्त आय सुनिश्चित होगी और ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को जोड़कर आय के बहुस्तरीय स्रोत तैयार किए जा रहे हैं, जिससे किसान मौसम या बाजार की अनिश्चितताओं से कम प्रभावित होंगे।

आबादी भूमि पर स्वामित्व अधिकार

श्री भूपेन्द्र सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर स्वामित्व अधिकार देने की योजना को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों और ग्रामीण परिवारों को कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे और संपत्ति के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भूमि की रजिस्ट्री पर होने वाला व्यय सरकार द्वारा वहन किया जाना गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत है। इससे ग्रामीण समाज में स्थायित्व और सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

दीर्घकालिक सुधार की शुरुआत

श्री सिंह ने कहा कि “कृषक कल्याण वर्ष” केवल एक वर्ष तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की कृषि व्यवस्था में व्यापक और स्थायी सुधार की शुरुआत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की यह दूरदर्शी नीति किसानों की आय बढ़ाने, खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने और मध्य प्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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