गुना में पिता को नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास, विशेष पॉक्सो न्यायालय का सख्त फैसला !

Spread the love

गुना।
जिले में एक अत्यंत संवेदनशील मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग बेटी से कई बार दुष्कर्म करने के दोषी पिता को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सोनाली शर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध केवल एक बच्ची के साथ नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और बचपन के साथ किया गया विश्वासघात है।

अदालत ने अपने आदेश में भावनात्मक टिप्पणी करते हुए कहा, “एक बेटी का बचपन बार-बार भरोसे के टूटने से सिसकता रहा। पिता के विश्वासघात ने उसकी हर खुशी को बुझा दिया था। वह टूटी थी, अपनों से हारी थी, पर बिखरी नहीं। जब उसने सच की रोशनी और अटल साहस से न्याय के दरवाजे को खटखटाया, तब न्यायालय ने उसे इंसाफ दिलाया।”

2024 में दर्ज हुई थी शिकायत

मामला वर्ष 2024 का है। जिले के म्याना क्षेत्र में रहने वाली 12 वर्षीय नाबालिग ने 27 अक्टूबर को थाने में अपने पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। बच्ची ने पुलिस को बताया कि वह आठ भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर है। परिवार आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में था और घर का माहौल लंबे समय से तनावपूर्ण बना हुआ था।

पीड़िता के अनुसार, उसके पिता शराब पीने के आदी थे और आए दिन घर में विवाद करते थे। घरेलू कलह के कारण परिवार में असुरक्षा का माहौल बना रहता था।

पारिवारिक विवाद के बाद शुरू हुई त्रासदी

पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि गर्मियों के दौरान उसके माता-पिता के बीच गंभीर झगड़ा हुआ था। पिता नशे की हालत में मां के साथ मारपीट कर रहे थे। स्थिति से परेशान होकर उसकी मां सबसे छोटी बेटी को लेकर घर छोड़कर चली गई थी।

उसी दिन पिता पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने थाने गए थे। रात में घर लौटने के बाद उन्होंने नाबालिग के साथ जबरदस्ती की। बच्ची ने बयान में कहा कि विरोध करने पर उसे चुप करा दिया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि यह घटना एक बार की नहीं थी, बल्कि आरोपी ने कई बार इस अपराध को दोहराया। लंबे समय तक भय और दबाव में रही बच्ची ने आखिरकार साहस जुटाकर पुलिस में शिकायत की।

पुलिस कार्रवाई और न्यायालय की सुनवाई

शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में मेडिकल परीक्षण, पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्यों को संकलित कर प्रकरण विशेष पॉक्सो न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में ठोस प्रमाण पेश किए। पीड़िता का बयान अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुआ। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।

अदालत का कड़ा रुख

फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने कहा कि एक पिता, जो बच्ची के लिए सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक होता है, जब वही अपराधी बन जाए तो यह समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जो उसकी अंतिम सांस तक प्रभावी रहेगी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी प्रकार की नरमी न्याय के साथ अन्याय होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *