स्थान: भोपाल
राजधानी भोपाल में इस वर्ष होली पर्व को लेकर व्यापक तैयारियां शुरू हो गई हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन की निगरानी में शहर के 1500 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन प्रस्तावित है। अलग-अलग वार्डों में परंपरागत मुहूर्त के अनुसार अग्नि प्रज्वलन होगा, जबकि प्रमुख चौराहों पर देर रात शुभ समय में होलिका जलाई जाएगी।
🌿 गोकाष्ठ को दी जा रही प्राथमिकता
इस बार भी पर्यावरण संरक्षण और गोवंश संवर्धन को ध्यान में रखते हुए गोकाष्ठ (गोबर से बने काष्ठ) से होलिका दहन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- शहर में 47 विक्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
- दैनिक भास्कर समूह और गोकाष्ठ संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण समिति इस अभियान से जुड़े हैं।
- लकड़ी की जगह गोकाष्ठ उपयोग करने से पेड़ों की कटाई कम होती है और प्रदूषण भी घटता है।

🗓️ होलिका दहन और रंगोत्सव की तिथि
हाल ही में ज्योतिष मठ संस्थान द्वारा आयोजित वेब संगोष्ठी में देशभर के पंचांगकर्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया:
- 🔥 2 मार्च की रात 2 बजे के बाद भद्रा पुच्छकाल समाप्त होने पर होलिका दहन।
- 🎨 4 मार्च को रंगोत्सव (धुलेंडी) मनाया जाएगा।
3 मार्च की रात पूर्णिमा समाप्त होकर प्रतिपदा तिथि लगने और ग्रहण सूतक प्रभावी रहने के कारण उस दिन होलिका दहन को शास्त्रसम्मत नहीं माना गया।
🚩 4 मार्च को निकलेगा पारंपरिक होली जुलूस
शहर के पुराने और नए इलाकों में 4 मार्च को रंग-गुलाल के कार्यक्रम और चल समारोह होंगे।
प्रमुख क्षेत्र:
- दयानंद चौक
- जुमेराती
- करोद
- कोलार
- संत नगर
- भेल क्षेत्र
दयानंद चौक से हिंदू उत्सव समिति द्वारा पारंपरिक चल समारोह निकाला जाएगा, जिसमें राधा-कृष्ण और भोलेनाथ की आकर्षक झांकियां शामिल रहेंगी।
🤝 सामाजिक समरसता का संदेश
कई वार्डों में सर्वधर्म सहभागिता के साथ होलिका दहन की तैयारियां हैं। जनप्रतिनिधि और स्थानीय समितियां मिलकर सामाजिक सद्भाव और एकता का संदेश देने वाले कार्यक्रम आयोजित करेंगी।
🔱 सबसे पहले उज्जैन में महाकाल के साथ होली
स्थान: उज्जैन
मंदिर: महाकालेश्वर मंदिर
देश में होली का पर्व सबसे पहले उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में मनाया जाएगा।
🔥 होलिका दहन
- भगवान महाकाल को 1 किलो हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा।
- संध्या आरती के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गोबर के उपलों से बनी होलिका का दहन होगा।
- सुरक्षा कारणों से श्रद्धालुओं को दहन स्थल के पास जाने की अनुमति नहीं होगी।
🌸 धुलेंडी पर विशेष आयोजन
- सुबह 4 बजे होने वाली भस्म आरती में सबसे पहले भगवान को गुलाल लगाया जाएगा।
- इसके बाद भांग और चंदन से विशेष श्रृंगार किया जाएगा।
🌑 ग्रहण के दौरान विशेष नियम
- सूतक काल में मंदिर के पट खुले रहेंगे।
- नियमित भोग नहीं लगेगा, केवल शक्कर का भोग अर्पित होगा।
- ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिर की शुद्धि कर नियमित पूजा-अर्चना और आरती होगी।
📌 खास बातें संक्षेप में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| होलिका दहन | 2 मार्च रात 2 बजे बाद |
| रंगोत्सव | 4 मार्च |
| भोपाल में स्थान | 1500+ |
| गोकाष्ठ विक्रय केंद्र | 47 |
| सबसे पहले होली | महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन |
यह आयोजन धार्मिक परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता—तीनों का संदेश देता है।
अगर आप चाहें तो मैं आपको होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और घर पर सुरक्षित तरीके से होली मनाने के सुझाव भी बता सकता हूँ।