सागर में रंगपंचमी महोत्सव: भजनों की धुन पर थिरके भक्त, राई नृत्य ने बांधा समां !

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सागर। शहर के राजीवनगर वार्ड स्थित बीएस जैन बगीचा के सामने बने श्रीराम जानकी पटैल मंदिर करीला धाम में रंगपंचमी महोत्सव पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। भक्ति, संगीत और लोक संस्कृति के संगम ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक और उत्सवी रंग में रंग दिया। दिनभर मंदिर परिसर में भजनों की गूंज सुनाई देती रही और श्रद्धालु भक्ति के रंग में डूबे नजर आए।

विशेष पूजन-अर्चन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

रंगपंचमी के अवसर पर सुबह मंदिर में भगवान श्रीराम दरबार, माता जानकी, लव-कुश एवं महर्षि वाल्मीकि का विधि-विधान से विशेष पूजन-अर्चन किया गया। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा संपन्न कराई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

भजनों की धुन पर झूमे श्रद्धालु

पूजन के बाद मंदिर परिसर के पास बनाए गए विशाल मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। मंच पर मौजूद गायकों ने बधाई और फागों का सुमधुर गायन प्रस्तुत किया। जैसे ही भजनों की मधुर धुन गूंजने लगी, माहौल भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालु भी खुद को रोक नहीं पाए और भजनों की ताल पर झूमते और थिरकते नजर आए।

नर्तकियों ने प्रस्तुत किया पारंपरिक राई नृत्य

कार्यक्रम के दौरान पांच नर्तकियों ने पारंपरिक बधाई और बुंदेलखंडी लोक संस्कृति से जुड़े प्रसिद्ध राई नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। रंग-बिरंगी पोशाकों में सजी नर्तकियों के नृत्य ने दर्शकों का दिल जीत लिया। उनके लयबद्ध कदम और लोकगीतों की धुन ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

मेले जैसा बना माहौल

महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा दृश्य देखने को मिला। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। बच्चों और महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ देर तक बनी रही।

भक्ति और संस्कृति का अनूठा संगम

रंगपंचमी के इस आयोजन में भक्ति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। भजन, फाग और राई नृत्य की प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजकों का कहना था कि इस तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में परंपराओं और आस्था को जीवित रखने का काम करते हैं।

पूरे दिन चले इस रंगपंचमी महोत्सव ने क्षेत्र के लोगों को भक्ति, संगीत और उत्सव के रंगों से सराबोर कर दिया।

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