नर्मदापुरम जिले में साइबर फ्रॉड के मामलों को लेकर पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ती जा रही है। जिले में कुल 40 साइबर फ्रॉड के प्रकरण लंबित हैं, जिनमें से सबसे अधिक मामले कोतवाली और माखननगर थानों में दर्ज हैं। इन मामलों की समीक्षा करते हुए पुलिस अधीक्षक (एसपी) सांई कृष्णा थोटा ने सख्त रुख अपनाते हुए थाना प्रभारियों को जल्द से जल्द प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिए हैं।
हाल ही में आयोजित साइबर फ्रॉड समीक्षा बैठक में एसपी ने सभी लंबित मामलों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने थाना प्रभारियों और एसडीओपी से एक-एक केस की प्रगति के बारे में जानकारी ली और स्पष्ट किया कि अगली बैठक तक मामलों के समाधान में ठोस प्रगति दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि परिणाम भी दिखने चाहिए।

जिले में साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या पुलिस के लिए चुनौती बनती जा रही है। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने और ठगी गई राशि वापस दिलाने में सफलता हासिल की है, लेकिन कुल लंबित मामलों की तुलना में यह उपलब्धि काफी कम है। यही कारण है कि एसपी ने इस बार सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
इन लंबित मामलों में सबसे चर्चित मामला देहात थाना क्षेत्र में दर्ज 1.68 करोड़ रुपए की ठगी का है, जिसमें एक एलआईसी अधिकारी को निशाना बनाया गया था। इस मामले को दर्ज हुए करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न तो पुलिस ठगी गई राशि बरामद कर सकी है और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार कर पाई है। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
एसपी की समीक्षा के दौरान इस केस को विशेष रूप से गंभीरता से लिया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई और किन कारणों से यह मामला लंबित है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि इस तरह के बड़े मामलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए।
एडिशनल एसपी (एएसपी) अभिषेक राजन ने बताया कि बैठक में सभी 40 लंबित मामलों की स्थिति पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हर केस में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि जल्द से जल्द निराकरण हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस समीक्षा का सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में देखने को मिलेगा।
यदि थानों की बात करें तो कोतवाली और माखननगर थाने में सबसे ज्यादा 8-8 मामले लंबित हैं। इसके अलावा इटारसी में 5, स्टेशन रोड पिपरिया में 4, देहात थाना में 4, शिवपुर और सिवनीमालवा में 3-3, जबकि गुर्रा, पथरौटा और सोहागपुर में 2-2 मामले लंबित हैं। डोलरिया थाना में 1 मामला अभी भी लंबित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर फ्रॉड के मामलों में जांच करना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें आरोपी अक्सर दूसरे राज्यों या देशों से जुड़े होते हैं और तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद पुलिस को आधुनिक तकनीकों और बेहतर समन्वय के माध्यम से इन मामलों का शीघ्र निराकरण करना होगा।
साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाएं आम लोगों के लिए भी चिंता का विषय हैं। ऐसे में पुलिस के साथ-साथ नागरिकों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी अनजान कॉल, लिंक या संदेश पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है।
कुल मिलाकर, नर्मदापुरम में साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों और लंबित जांच ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। अब देखना होगा कि एसपी के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस इन मामलों के निराकरण में कितनी तेजी लाती है और पीड़ितों को न्याय दिलाने में कितनी सफल होती है।