मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में एक नाबालिग के साथ हुई मारपीट और बंधक बनाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भिंड रोड स्थित एक निजी फैक्ट्री में प्लास्टिक चोरी के शक में घुसे 16 वर्षीय किशोर को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़कर न केवल बेरहमी से पीटा, बल्कि उसे कुर्सी से बांधकर कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा। घटना की जानकारी मिलने के बाद देर रात पुलिस मौके पर पहुंची और किशोर को मुक्त कराया गया।
जानकारी के अनुसार, मुरैना निवासी यह किशोर ग्वालियर के हजीरा क्षेत्र में अपनी बहन के साथ रहकर कबाड़ का काम करता है। वह रोजाना लोहे और प्लास्टिक का कबाड़ इकट्ठा कर बेचकर अपना जीवनयापन करता है। शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे वह भिंड रोड स्थित यूनपेच फैक्ट्री की बाउंड्री वॉल फांदकर अंदर घुस गया। फैक्ट्री परिसर में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री देखकर किशोर के मन में उसे चोरी कर बेचने का लालच आ गया।

हालांकि, फैक्ट्री के अंदर घुसते ही सुरक्षा गार्ड्स की नजर उस पर पड़ गई। गार्ड्स ने तुरंत उसे पकड़ लिया और एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया। आरोप है कि इसके बाद गार्ड्स ने किशोर के साथ मारपीट शुरू कर दी। कुछ देर बाद वहां पहुंचे सिक्योरिटी इंचार्ज विनोद सिंह ने भी उसे पुराने चोरी के मामलों में आरोपी ठहराते हुए पीटना शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित के अनुसार, किशोर को कुर्सी से बांध दिया गया था और उसके हाथ-पैर कसकर जकड़े गए थे। उसे घंटों तक कमरे में बंद रखा गया और लगातार मारपीट की जाती रही। यह सिलसिला शाम से लेकर रात करीब 10 बजे तक चलता रहा। इस दौरान नाबालिग दर्द से चीखता रहा, लेकिन किसी ने उसकी मदद करने की हिम्मत नहीं जुटाई।
घटना का खुलासा तब हुआ जब फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोगों ने किशोर की चीख-पुकार सुनी। उन्हें शक हुआ कि अंदर कुछ गलत हो रहा है। स्थानीय लोगों ने तुरंत सामाजिक कार्यकर्ताओं को सूचना दी और डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को भी अवगत कराया।
सूचना मिलते ही गोला का मंदिर थाना पुलिस और डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचने के बाद फैक्ट्री परिसर में हड़कंप मच गया। स्थिति बिगड़ती देख फैक्ट्री प्रबंधन ने अपने प्रतिनिधि को मौके पर भेजा। इसके बाद पुलिस को अंदर जाने की अनुमति दी गई, जहां किशोर को कमरे से बाहर निकाला गया।
पुलिस ने जब किशोर से पूछताछ की तो उसने पूरी घटना का खुलासा किया। उसने बताया कि उसे बेरहमी से पीटा गया और कुर्सी से बांधकर कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया। किशोर के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए, जिससे मारपीट की पुष्टि होती है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद किशोर के परिजन भी थाने पहुंच गए। देर रात तक इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को लेकर चर्चा चलती रही। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला, क्या किसी व्यक्ति को चोरी के शक में इस तरह कानून हाथ में लेने का अधिकार है? दूसरा, फैक्ट्री जैसी जगहों पर सुरक्षा के नाम पर इस तरह की हिंसा को कैसे रोका जाएगा? और तीसरा, एक नाबालिग के साथ इस प्रकार का व्यवहार समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
कानून के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को अपराध के शक में पकड़ने के बाद उसे पुलिस के हवाले करना अनिवार्य है। स्वयं सजा देना या हिंसा करना पूरी तरह गैरकानूनी है। खासकर नाबालिगों के मामलों में कानून और भी सख्त है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते पुलिस नहीं पहुंचती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और फैक्ट्री के सुरक्षा कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में प्रशासन कितनी सख्ती दिखाता है और क्या पीड़ित किशोर को न्याय मिल पाता है या नहीं।