उज्जैन के पार्श्वनाथ कॉलोनी निवासी गुरकीरत सिंह मनोचा हत्याकांड में अब परिवार के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। करीब 9 दिन की लंबी प्रतीक्षा और प्रशासनिक प्रयासों के बाद अब कनाडा से उनका पार्थिव शरीर भारत लाए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। संभावना है कि अगले 2 से 3 दिनों में गुरकीरत का शव उज्जैन पहुंच जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
14 मार्च को कनाडा में हुई थी दर्दनाक हत्या
गुरकीरत सिंह मनोचा की 14 मार्च 2026 को फोर्ट सेंट जॉन में हत्या कर दी गई थी। जानकारी के अनुसार, कुछ युवकों ने पहले उनकी पिटाई की और फिर उन पर कार चढ़ा दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
इस घटना ने न केवल उज्जैन बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और वे लगातार एक ही मांग कर रहे थे—गुरकीरत का पार्थिव शरीर भारत लाया जाए, ताकि उनका अंतिम संस्कार अपने घर में किया जा सके।

एम्बेसी के मेल से जगी उम्मीद
सोमवार को परिवार को कनाडा एम्बेसी की ओर से एक महत्वपूर्ण ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें बताया गया कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 2 से 3 दिनों के भीतर पार्थिव शरीर भारत भेज दिया जाएगा।
इस जानकारी के बाद परिवार में उम्मीद की किरण जगी है कि गुरुवार तक गुरकीरत का शव उज्जैन पहुंच सकता है।
आर्थिक तंगी बनी सबसे बड़ी बाधा
गुरकीरत के शव को भारत लाने में सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक थी। कनाडा प्रशासन द्वारा शव सौंपने के लिए लगभग 40 हजार डॉलर (करीब 35 लाख रुपए) जमा कराने की शर्त रखी गई थी।
इसके अलावा शव को भारत लाने में लगभग 10 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च भी आ रहा था, जो परिवार के लिए वहन करना संभव नहीं था।
इसी कारण परिजनों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई थी।
परिवार ने पीएम और विदेश मंत्रालय से लगाई गुहार
गुरकीरत के परिवार ने नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय को ईमेल कर मदद मांगी थी। उन्होंने अनुरोध किया था कि या तो सरकार परिवार के दो सदस्यों को कनाडा भेजने की व्यवस्था करे या फिर पार्थिव शरीर को भारत लाने में सहयोग करे।
परिवार की इस अपील ने प्रशासन और सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
सीएम के हस्तक्षेप से तेज हुई प्रक्रिया
मामले में निर्णायक मोड़ तब आया जब डॉ. मोहन यादव ने स्वयं हस्तक्षेप किया।
17 मार्च को उज्जैन दौरे के दौरान उन्होंने परिजनों से मुलाकात की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उनके निर्देश पर प्रशासन ने तुरंत विदेश मंत्रालय और कनाडा स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधा।

प्रशासन और दूतावास के समन्वय से मिला समाधान
इस मामले में प्रशासन, मीडिया और दूतावास के बीच लगातार समन्वय बना रहा। परिवार की ओर से MADAD पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद भारतीय उच्चायोग ने कनाडा प्रशासन से संपर्क कर प्रक्रिया को तेज किया।
नोडल अधिकारी के रूप में अभिलाष जैन ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराते हुए इस पूरी प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
15 दिन बाद ही मिलना था शव
शुरुआती जानकारी के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही शव सौंपा जाना था, जिसमें करीब 15 दिन का समय लग सकता था।
लेकिन अब प्रशासनिक हस्तक्षेप और समन्वय के चलते यह प्रक्रिया अपेक्षा से पहले पूरी होती नजर आ रही है।
परिवार का भावुक इंतजार
गुरकीरत की असामयिक मृत्यु से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। परिजन लगातार उनके पार्थिव शरीर के भारत आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि वे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
घर पर रिश्तेदारों और परिचितों का आना-जाना लगा हुआ है और सभी परिवार को सांत्वना देने में जुटे हैं।

न्याय की मांग भी उठी
गुरकीरत के पिता गुरजीत सिंह मनोचा ने केंद्र और राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि केवल पार्थिव शरीर लाना ही नहीं, बल्कि उनके बेटे को न्याय दिलाना भी उतना ही जरूरी है।
विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर विदेशों में रह रहे भारतीय छात्रों और युवाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सरकार को त्वरित कार्रवाई और कूटनीतिक स्तर पर सख्त रुख अपनाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
गुरकीरत सिंह मनोचा की हत्या एक बेहद दुखद घटना है, जिसने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी। हालांकि, अब उनके पार्थिव शरीर के उज्जैन आने की उम्मीद ने परिवार को थोड़ी राहत जरूर दी है।
सरकार, प्रशासन और दूतावास के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हो पाया है कि गुरकीरत का अंतिम संस्कार उनके अपने शहर में हो सके।
अब पूरा शहर और परिवार उस पल का इंतजार कर रहा है, जब गुरकीरत अपने घर लौटेंगे—हालांकि इस बार खामोशी के साथ।