भोपाल। मध्य प्रदेश में आगजनी की बढ़ती घटनाओं और लगातार हो रही जान-माल की हानि के बावजूद फायर सेफ्टी एक्ट पिछले 7 वर्षों से लागू नहीं हो पाया है। हैरानी की बात यह है कि इस एक्ट को दो मंत्रियों की मंजूरी और विधि विभाग की स्वीकृति मिल चुकी है, फिर भी यह फाइलों में ही अटका हुआ है।
इस देरी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर केंद्र सरकार के “मॉडल फायर एक्ट” को राज्य में लागू करने में इतनी बाधा क्यों आ रही है।
इंदौर हादसे ने फिर उठाए सवाल
हाल ही में इंदौर में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने फायर सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया। बृजेश्वरी एनेक्स में लगी आग में एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत हो गई।
पीड़ित परिवार के सदस्य सौरभ पुगलिया ने डॉ. मोहन यादव से शिकायत करते हुए कहा कि फायर ब्रिगेड देर से पहुंची, पानी की कमी थी और उपकरण भी पर्याप्त नहीं थे।
इस घटना ने यह साफ कर दिया कि फायर सेफ्टी सिस्टम में गंभीर खामियां हैं।
2019 से शुरू हुआ था फायर एक्ट का सफर
केंद्र सरकार ने 2019 में सभी राज्यों को एक समान व्यवस्था लागू करने के लिए मॉडल फायर सेफ्टी एक्ट का ड्राफ्ट भेजा था।
मध्य प्रदेश में भी इस पर काम शुरू हुआ और नगरीय प्रशासन विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार किया।
2020 में मिली राजनीतिक मंजूरी, फिर भी रुका मामला
2020 में तत्कालीन मंत्री जयवर्धन सिंह ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद इसे विधि विभाग को भेजा गया।
लेकिन बाद में यह कहते हुए प्रस्ताव वापस ले लिया गया कि “मप्र भू-विकास नियम 2012” में पहले से ही कुछ प्रावधान मौजूद हैं, इसलिए अलग एक्ट की जरूरत नहीं है।
2021 की घटनाओं के बाद फिर उठा मुद्दा
हमीदिया अस्पताल में आग लगने से नवजात शिशुओं की मौत और सतपुड़ा भवन में लगी भीषण आग के बाद फायर एक्ट को लागू करने की मांग तेज हो गई।
तत्कालीन मुख्य सचिव ने भी इस पर तेजी से कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रस्ताव दोबारा आगे बढ़ा और मंत्री भूपेंद्र सिंह से प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल गई।

2023 में विधि विभाग की क्लीनचिट
17 अप्रैल 2023 को विधि विभाग ने संशोधित फायर एक्ट को मंजूरी दे दी।
लेकिन इसके बाद भी यह प्रस्ताव वरिष्ठ अधिकारियों की समिति के सामने नहीं रखा गया और फाइल फिर से संशोधन के नाम पर लंबित कर दी गई।
2025 में नया ड्राफ्ट, फिर भी अनिश्चितता
अब “फायर एक्ट 2025” के नाम से नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जो फिलहाल वित्त विभाग में परीक्षण के लिए लंबित है।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरान यह जानकारी भी सामने नहीं लाई गई कि 2023 का ड्राफ्ट पहले ही मंजूर हो चुका है।
आखिर क्यों नहीं लागू हो रहा एक्ट?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी वजह अफसरशाही की अनिच्छा बताई जा रही है।
मुख्य कारण:
- नया डायरेक्टोरेट बनने का प्रावधान
मॉडल एक्ट के तहत राज्य स्तर पर फायर डायरेक्टोरेट बनना है, जिससे नगरीय विकास विभाग की भूमिका कम हो जाएगी। - फायर सेवाएं निकायों से अलग होंगी
वर्तमान में फायर सेवाएं नगर निगम और नगरपालिकाओं के अधीन हैं। नए एक्ट में इन्हें अलग किया जाएगा। - हर आयोजन के लिए NOC जरूरी
बड़े धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों के लिए फायर एनओसी लेना अनिवार्य होगा, जिससे नियंत्रण सख्त हो जाएगा। - अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी
नए नियमों में निरीक्षण और कार्रवाई के अधिकार स्पष्ट होंगे, जिससे लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
फायर एक्ट 2023 के प्रमुख प्रावधान
यदि यह एक्ट लागू होता है, तो कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
- 9 मीटर ऊंची इमारतों के लिए भी फायर एनओसी अनिवार्य
- सार्वजनिक आयोजनों में फायर सेफ्टी जरूरी
- हर साल यूटिलिटी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य
- हर भवन में फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जरूरी
- फायर स्टेशन और नया कैडर विकसित होगा
- 3 घंटे के नोटिस पर निरीक्षण का अधिकार
विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया जा चुका है। विधायक अभिलाष पांडे ने सरकार से सवाल किया कि आखिर यह एक्ट कब लागू होगा।
इस पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि नया ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है और अगले 2-3 महीनों में इसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
जमीन पर हालात चिंताजनक
राज्य में कई बड़े अस्पतालों और इमारतों में फायर सेफ्टी के बेसिक इंतजाम तक नहीं हैं।
हाल ही में सामने आई रिपोर्ट में इंदौर के 12 बड़े अस्पतालों में फायर सेफ्टी की कमी उजागर हुई है, जिससे मरीजों की जान खतरे में है।
मध्य प्रदेश में फायर सेफ्टी एक्ट का लंबे समय तक लागू न होना एक गंभीर प्रशासनिक समस्या को दर्शाता है।
जहां एक ओर केंद्र सरकार ने वर्षों पहले मॉडल तैयार कर दिया, वहीं दूसरी ओर राज्य में यह अब भी फाइलों में उलझा हुआ है।
लगातार हो रही आगजनी की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब इस एक्ट को और देर तक टालना खतरनाक हो सकता है। जरूरत है कि सरकार और प्रशासन मिलकर जल्द से जल्द इसे लागू करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और लोगों की जान बचाई जा सके।