मध्यप्रदेश के सागर जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक ने प्रशासनिक लापरवाही से तंग आकर कलेक्टर कार्यालय परिसर में खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।
शिकायत लेकर पहुंचा था युवक, नहीं मिली सुनवाई
मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचे युवक मोनू अहिरवार ने बताया कि वह अपनी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत लेकर कई बार अधिकारियों के पास जा चुका है, लेकिन हर बार उसे निराशा ही हाथ लगी। उसकी बात नहीं सुनी जा रही थी, जिससे वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गया था।

जमीन पर कब्जे का आरोप
मोनू अहिरवार, जो ग्राम सिगदोनी बंडा का निवासी है, ने बताया कि उसके पिता बूठे अहिरवार को शासन द्वारा पट्टे की जमीन आवंटित की गई थी। यह जमीन खसरा क्रमांक 91 में लगभग 1.50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
उसका आरोप है कि गांव के ही एक सचिव, राजवीर सिंह, ने इस जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, वह परिवार को अपनी ही जमीन पर फसल काटने से भी रोक रहा है।
बार-बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
मोनू के अनुसार, उसने इस मामले में स्थानीय स्तर से लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय तक कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कहीं भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। लगातार अनदेखी और देरी से परेशान होकर उसने यह कठोर कदम उठाने का प्रयास किया।
कलेक्टर कार्यालय में मचा हड़कंप
घटना उस समय हुई जब युवक ने कलेक्टर कार्यालय परिसर में ही अपने ऊपर पेट्रोल डाल लिया। वहां मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने जैसे ही यह दृश्य देखा, तुरंत हरकत में आए।
पुलिस ने बिना देर किए युवक को पकड़ लिया और उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीन ली। अधिकारियों ने उसे शांत कराया और समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। उनकी तत्परता से एक गंभीर घटना टल गई।
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
घटना के बाद प्रशासन भी हरकत में आया। अधिकारियों ने बंडा विकासखंड के तहसीलदार और पटवारी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही युवक की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जमीन विवाद की जांच शुरू कर दी गई है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है। एक आम नागरिक को अपनी समस्या के समाधान के लिए इस हद तक जाने को मजबूर होना, सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
अगर समय रहते उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई की जाती, तो शायद वह इतना बड़ा कदम उठाने के बारे में सोचता भी नहीं।

समाज और प्रशासन के लिए संदेश
यह मामला न केवल प्रशासन के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि समस्याओं का समाधान संवाद और कानून के जरिए ही होना चाहिए।
किसी भी परिस्थिति में आत्मघाती कदम समाधान नहीं होता, बल्कि इससे स्थिति और जटिल हो जाती है।
सागर की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आम जनता की समस्याओं को समय पर सुनना और उनका समाधान करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी जरूरी है कि लोग कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखें और कानूनी रास्तों पर भरोसा रखें।
फिलहाल, प्रशासन द्वारा जांच शुरू कर दी गई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही युवक को न्याय मिलेगा और उसकी जमीन का विवाद सुलझाया जाएगा।