मध्य प्रदेश के भिंड जिले के एक किसान परिवार का इकलौता बेटा, 21 वर्षीय संस्कार श्रीवास्तव, जो स्कॉटलैंड में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा था, अब रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाया गया है। इस घटना ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जहां स्कॉटलैंड पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, वहीं परिजन इस निष्कर्ष को सिरे से खारिज करते हुए हत्या की आशंका जता रहे हैं। इस पूरे मामले में कई ऐसे सवाल उठ खड़े हुए हैं, जिनका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है।
संस्कार श्रीवास्तव भिंड जिले के मौ कस्बे के रहने वाले थे। वह एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उनके सपने बड़े थे। परिवार ने लगभग 40 लाख रुपए का कर्ज लेकर उन्हें स्कॉटलैंड भेजा था, जहां वे यूनिवर्सिटी ऑफ स्टर्लिंग में एमएससी (फॉरेंसिक साइंस) की पढ़ाई कर रहे थे। संस्कार पढ़ाई में बेहद होनहार थे और अपने बैच में टॉप कर रहे थे। इसके साथ ही वे पार्ट-टाइम जॉब भी करते थे, जिससे उन्हें हर महीने करीब 90 हजार से एक लाख रुपए तक की आय होती थी।
परिवार के अनुसार, संस्कार न केवल पढ़ाई में उत्कृष्ट थे, बल्कि मानसिक रूप से भी काफी मजबूत और जिम्मेदार थे। वे नियमित रूप से अपने माता-पिता से बात करते थे और घर की स्थिति को समझते हुए आर्थिक सहयोग देने की भी बात करते थे। ऐसे में अचानक उनकी मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है।

संस्कार की मां नीलम श्रीवास्तव ने बताया कि होली के दिन, 5 मार्च को, उन्होंने अपने बेटे से करीब दो घंटे तक वीडियो कॉल पर बात की थी। उस दौरान संस्कार बेहद खुश नजर आ रहे थे और उन्होंने आश्वासन दिया था कि पढ़ाई पूरी करने के बाद अगले साल वह घर लौट आएंगे। लेकिन इसके दो दिन बाद ही उनकी मौत की खबर आ गई। मां का कहना है कि उनका बेटा आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता।
पिता कुलदीप श्रीवास्तव, जो आंखों की बीमारी के कारण कम देख पाते हैं, ने भी इस घटना को संदिग्ध बताया है। उन्होंने प्रशासन और भारत सरकार से मांग की है कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। जानकारी के अनुसार, संस्कार का शव 27 मार्च को दिल्ली पहुंच सकता है।
परिजनों ने मांग की है कि ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में संस्कार का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया जाए, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। परिवार का कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक वे इस मामले को आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं।
इस पूरे मामले में कई ऐसे बिंदु हैं, जो इसे संदिग्ध बनाते हैं। सबसे पहला सवाल संस्कार के बैंक खाते से जुड़े लेन-देन को लेकर है। परिवार के अनुसार, उनके खाते से करीब 2.50 लाख रुपए किसी अन्य खाते में ट्रांसफर किए गए हैं, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं है। यह ट्रांजैक्शन कब और किसने किया, यह स्पष्ट नहीं है।

दूसरा बड़ा सवाल संस्कार के दोस्तों की चुप्पी को लेकर है। संस्कार ने जिन तीन दोस्तों के नंबर घर पर दिए थे, वे इस घटना के बाद से किसी भी कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं। इससे परिवार की शंका और गहरी हो गई है।
तीसरा सवाल उनके हॉस्टल रूम को लेकर है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि संस्कार ने आत्महत्या की, लेकिन उनका कमरा खुला मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि उन्होंने आत्महत्या की, तो वह अपना कमरा खुला छोड़कर बाहर क्यों गए?
इसके अलावा, यूनिवर्सिटी का रिकॉर्ड भी चिंता का विषय है। पिछले 13 महीनों में इसी यूनिवर्सिटी में यह तीसरी संदिग्ध मौत बताई जा रही है। इससे पहले भी दो छात्रों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो चुकी है, जबकि एक छात्रा अब तक लापता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वहां छात्रों की सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर लापरवाही हो रही है?
एक और महत्वपूर्ण पहलू संस्कार के मोबाइल डेटा का गायब होना है। परिवार का कहना है कि उनके मोबाइल से डेटा डिलीट कर दिया गया है, जबकि यह जांच के लिए बेहद अहम सबूत हो सकता था। मोबाइल रिकॉर्ड से यह पता चल सकता था कि आखिरी समय में वे किससे संपर्क में थे और उनकी मानसिक स्थिति कैसी थी।
संस्कार के चाचा अनूप श्रीवास्तव ने बताया कि संस्कार बेहद मेहनती और जिम्मेदार युवक था। उसने ग्वालियर के एमएलबी कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था और आगे की पढ़ाई के लिए विदेश गया था। वह हमेशा अपने परिवार को गर्व महसूस कराता था और भविष्य के प्रति आशावादी था।

इस घटना ने विदेश में पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में उज्जैन के एक अन्य छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा की कनाडा में हत्या का मामला भी सामने आया था, जहां कुछ युवकों ने उनकी पिटाई कर दी और फिर उन पर गाड़ी चढ़ा दी। ऐसे लगातार सामने आ रहे मामलों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
संस्कार के परिवार ने भारत सरकार और संबंधित अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि केवल औपचारिक जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। यदि यह हत्या है, तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
यह मामला केवल एक परिवार का नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय छात्रों का भी है, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश जाते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित देशों और संस्थानों की जिम्मेदारी है।
फिलहाल, संस्कार श्रीवास्तव की मौत एक पहेली बनी हुई है। परिवार न्याय की उम्मीद में है और चाहता है कि उनके बेटे के साथ क्या हुआ, इसकी सच्चाई सामने आए। जब तक सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, तब तक यह मामला केवल एक आत्महत्या का नहीं, बल्कि एक संभावित अपराध का प्रतीत होता रहेगा।