नई तकनीक और फूड प्रोसेसिंग से बढ़ेगी किसानों की आमदनी !

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सागर में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा दो दिवसीय कार्यशाला-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला पंचायत सभागार में एकीकृत बागवानी मिशन के अंतर्गत संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों, उद्यमियों और महिला कृषकों ने भाग लिया।

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने उद्यानिकी फसलों की नवीन तकनीकों, फ्रूट फॉरेस्ट्री और हाइड्रोपोनिक जैसी उन्नत खेती प्रणालियों की जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि अधिकारी आशीष त्रिपाठी ने किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि बदलते समय में परंपरागत खेती के साथ नई पद्धतियों को अपनाना जरूरी हो गया है, जिससे उत्पादन और आय दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।

युवा कृषक आकाश चौरसिया ने जल संकट को ध्यान में रखते हुए मल्टी लेयर खेती और बेहतर जल प्रबंधन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना समय की मांग है।

उपसंचालक उद्यान पीएस बडोले ने किसानों को मौसम आधारित खेती के फायदे बताते हुए कहा कि सही समय और सही फसल का चयन करने से बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ संभव है।

कार्यशाला के दूसरे दिन केएस यादव ने जैविक खेती को स्वास्थ्य और आय दोनों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है।

रश्मि पांडे ने खाद्य प्रसंस्करण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि टमाटर, प्याज और मोरिंगा जैसे उत्पादों में वैल्यू एडिशन के जरिए किसानों की आय कई गुना बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण और विपणन भी उतना ही जरूरी है।

मयंक मेहरा ने PMFME योजना के तहत स्वरोजगार और ब्रांडिंग के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि यदि किसान अपने उत्पादों को ब्रांड बनाकर बाजार में उतारें, तो उन्हें अधिक लाभ मिल सकता है।

वहीं केके मिश्रा ने सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने किसानों को समूह बनाकर काम करने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की सलाह दी।

कार्यशाला में 250 से अधिक किसान, उद्यमी और महिला कृषकों की भागीदारी रही। सभी प्रतिभागियों ने इसे उपयोगी बताते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई।

यह कार्यशाला किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली साबित हुई, जिससे वे तकनीक, प्रसंस्करण और बाजार के बेहतर उपयोग से अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं |

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