मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में गुरुवार शाम हुआ भीषण सड़क हादसा पूरे प्रदेश को झकझोर गया। मोहखेड़ ब्लॉक क्षेत्र में एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन से टक्कर के बाद यात्रियों से भरी बस पलट गई, जिसमें दोनों वाहनों के ड्राइवर समेत 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों का इलाज छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में जारी है, जहां एक की हालत गंभीर होने पर उसे नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
हादसे की भयावह तस्वीर
यह दुर्घटना गुरुवार शाम करीब 6:30 बजे हुई, जब MP28 P 0321 नंबर की बस ग्रामीणों को लेकर जा रही थी। बस में कुल 51 यात्री सवार थे, जो मोहखेड़ ब्लॉक की ग्वारा पंचायत के कोसमढाना, करेर और भंडारकुंड गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। अचानक सामने से आ रही पिकअप से जोरदार टक्कर हुई, जिससे बस अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस कई फीट दूर तक घिसटती चली गई और उसमें बैठे लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई यात्री बस के नीचे दब गए, जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए।

10 लोगों की मौत, गांवों में मातम
इस हादसे में जान गंवाने वालों में 6 पुरुष, 3 महिलाएं और एक बच्चा शामिल है। मृतकों में बस ड्राइवर कमल (54) और पिकअप चालक रवि धारे (40) भी शामिल हैं। अन्य मृतकों में भागवती, दौलत, शकुन यादव, रामदास, रमेश, सिया बाई और 7 वर्षीय वंश जैसे नाम शामिल हैं।
सबसे अधिक प्रभावित करेर गांव रहा, जहां पांच लोगों की एक साथ मौत हुई। शुक्रवार सुबह जब इनकी अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। हर घर से रोने और सिसकने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। परिजन शवों से लिपटकर बिलखते रहे, जबकि आसपास मौजूद लोग उन्हें संभालते नजर आए।
एक साथ जलीं पांच चिताएं
करेर गांव के श्मशान घाट में पांच चिताएं एक साथ जलाई गईं। किसी के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी तो किसी भाई ने अपने भाई को अंतिम विदाई दी। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
अंतिम यात्रा में आसपास के गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता का माहौल है।

घायलों का इलाज जारी
हादसे में घायल हुए 30 से अधिक लोगों का इलाज छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश घायलों की हालत स्थिर है, लेकिन एक व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसे बेहतर इलाज के लिए नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
अस्पताल के डीन अभय सिन्हा के मुताबिक, गंभीर घायल के सिर में गहरी चोट है और खून के थक्के जमने के कारण स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
प्रशासन और पुलिस की सक्रियता
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
करेर गांव में स्थिति को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारी ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें सांत्वना दे रहे हैं और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

सीएम का दौरा, नेताओं की मौजूदगी
हादसे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के छिंदवाड़ा पहुंचने की सूचना है। वे मृतकों के परिजनों से मुलाकात करेंगे और घायलों का हाल जानेंगे। इससे पहले प्रभारी मंत्री राकेश सिंह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और कहा कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है।
करेर गांव में अंतिम संस्कार के दौरान कांग्रेस के कई नेता भी मौजूद रहे, जिनमें जिला अध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे, विधायक सुनील उईके, विजय चौरे, नीलेश उईके और सुमित चौधरी शामिल हैं।
आरोपों से गरमाई सियासत
इस हादसे के बाद एक और बड़ा विवाद सामने आया है। मृतक सिया बाई की 17 वर्षीय बेटी शीताली ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने दावा किया कि उसकी मां को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जबरदस्ती ले जाया गया था।
शीताली के अनुसार, उन्हें धमकी दी गई थी कि यदि वे कार्यक्रम में नहीं जाएंगी तो रोजगार गारंटी और लाड़ली बहना योजना के पैसे उनके खाते में नहीं आएंगे। इस बयान के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है और प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मामले की जांच की मांग उठने लगी है।
गांवों में पसरा सन्नाटा
हादसे के बाद कोसमढाना, करेर और भंडारकुंड गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिन घरों में कल तक खुशियां थीं, वहां आज मातम का माहौल है। कई परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। हर कोई इस घटना से स्तब्ध है और मृतकों के परिवारों को सांत्वना दे रहा है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, जो इस तरह की दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़कों की स्थिति सुधारने के साथ-साथ यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
छिंदवाड़ा का यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के जीवन में आई अपूरणीय क्षति है। एक पल में खुशियां मातम में बदल गईं और कई घरों के चिराग बुझ गए। प्रशासन, सरकार और समाज के लिए यह एक चेतावनी है कि सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर गंभीरता से कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।