सागर शहर में शुक्रवार को रामनवमी का पर्व बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को विशेष विधि-विधान के साथ मनाया गया। इसके बाद शाम होते-होते पूरा शहर भक्ति और उत्सव के रंग में रंग गया, जब भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
यह भव्य शोभायात्रा सिद्धेश्वर मंदिर, चंपाबाग से प्रारंभ हुई। पालकी में विराजमान भगवान श्रीराम शहर भ्रमण के लिए निकले, जिनके दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर उमड़ पड़े। शोभायात्रा सराफा बाजार, कोतवाली क्षेत्र से होती हुई तीनबत्ती तिराहे पर पहुंची, जहां भव्य स्वागत किया गया। यहां रंग-बिरंगी आतिशबाजी, फूलों की वर्षा और गुलाल उड़ाकर भगवान का अभिनंदन किया गया।

तीनबत्ती तिराहे पर 11 पंडितों द्वारा भगवान की महाआरती की गई, जो इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। श्रद्धालुओं ने एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा और हर ओर जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि यह शोभायात्रा पिछले 16 वर्षों से लगातार निकाली जा रही है और अब यह सागर शहर की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा बन चुकी है। उत्सव समिति के तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा में शहर के विभिन्न समाजों और संगठनों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शोभायात्रा में शामिल झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की सुंदर झांकियों के साथ-साथ भगवान परशुराम, संत रविदास, महावीर स्वामी, गुरु नानक देव, झूलेलाल, मां कर्मादेवी और महाराजा अग्रसेन की झांकियां भी शामिल की गईं। इन झांकियों ने धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संदेश दिया।

शहर के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर भगवान का अभिनंदन किया और जगह-जगह प्रसाद वितरण भी किया गया। कई स्थानों पर मंच बनाकर श्रद्धालुओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
शोभायात्रा के दौरान पूरा शहर केसरिया रंग में रंगा नजर आया। सड़कों पर केसरिया ध्वज और बैनर लगाए गए थे, जिससे धार्मिक वातावरण और भी अधिक सजीव हो गया। यात्रा में शामिल महिला और पुरुष केसरिया वेशभूषा में नजर आए, जो आस्था और एकता का प्रतीक था।
यात्रा में अखाड़ों के कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। युवाओं ने तलवारबाजी, लाठी और अन्य पारंपरिक करतब दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। डीजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा जमकर नाचते-गाते नजर आए। इसके अलावा घोड़े और डमरू दल भी शोभायात्रा का हिस्सा बने, जिससे आयोजन और भी भव्य हो गया।

भक्तों की भारी भीड़ के बीच प्रशासन ने सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए थे। पुलिस बल तैनात रहा और यातायात को व्यवस्थित करने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जिससे शोभायात्रा शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सकी।
कुल मिलाकर, सागर में निकली यह शोभायात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक एकता और परंपरा का प्रतीक बन गई है। हर वर्ष की तरह इस बार भी इस आयोजन ने लोगों के दिलों में भक्ति, उत्साह और सामूहिकता की भावना को और मजबूत किया। आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा इसी तरह जारी रहने की उम्मीद है, जो सागर की पहचान बन चुकी है।