सागर: समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी 10 और 15 अप्रैल से शुरू, सरकार ने पूरी की तैयारियां

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संभागीय जनसंपर्क कार्यालय सागर
सागर | 30 मार्च 2026

मध्यप्रदेश सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस संबंध में सोमवार को एक उच्चस्तरीय कैबिनेट समिति की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

10 और 15 अप्रैल से शुरू होगी खरीदी

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी कि निर्णय के अनुसार—

  • इंदौर संभाग
  • उज्जैन संभाग
  • नर्मदापुरम संभाग
  • भोपाल संभाग

में गेहूं खरीदी 10 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। वहीं प्रदेश के अन्य सभी संभागों में खरीदी 15 अप्रैल 2026 से प्रारंभ की जाएगी।

व्यवस्थाओं को लेकर दिए गए निर्देश

सरकार ने सभी संबंधित विभागों को समय रहते जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इनमें शामिल हैं—

  • खरीदी केंद्रों की स्थापना
  • पर्याप्त भंडारण व्यवस्था
  • परिवहन की सुचारु व्यवस्था
  • किसानों को समय पर भुगतान

वैश्विक हालातों को देखते हुए विशेष सतर्कता

बैठक में वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के प्रभावों पर भी चर्चा की गई। सरकार ने खाद्यान्न आपूर्ति और भंडारण व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी स्थिति में प्रदेश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित न हो।

किसानों को समय पर भुगतान पर जोर

मंत्री राजपूत ने स्पष्ट किया कि खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध होगी। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिले, इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत करने तथा निगरानी तंत्र को सख्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में शामिल रहे मंत्री और अधिकारी

इस अहम बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • करण सिंह वर्मा (राजस्व मंत्री)
  • राव उदय प्रताप सिंह (परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री)
  • एंदल सिंह कंसाना (कृषि विकास मंत्री)
  • लखन पटेल (पशुपालन राज्य मंत्री)

इसके अलावा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी बैठक में ऑनलाइन जुड़े।

खाद्य सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि समय पर और व्यवस्थित गेहूं खरीदी से किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, साथ ही प्रदेश में खाद्यान्न प्रबंधन भी सुदृढ़ होगा। बदलते वैश्विक हालातों के बीच यह कदम राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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