राहतगढ़ में संत सेन जी महाराज जयंती पर भव्य आयोजन !

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सागर, 14 अप्रैल 2026। राहतगढ़ नगर में संत शिरोमणि संत सेन जी महाराज की जयंती के अवसर पर एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर उन्होंने संत सेन जी महाराज के जीवन, उनके विचारों और समाज के लिए किए गए उनके अमूल्य योगदान को विस्तार से स्मरण करते हुए लोगों को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का वातावरण पूरी तरह श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक एकता की भावना से ओत-प्रोत नजर आया। मंच पर उपस्थित अतिथियों ने संत सेन जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में उपस्थित हजारों लोगों ने संत सेन जी के जयकारों के साथ पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया।

अपने उद्बोधन में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि संत सेन जी महाराज का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि संत सेन जी का जन्म 14वीं से 15वीं शताब्दी के मध्य मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ क्षेत्र में हुआ माना जाता है। वे एक साधारण परिवार में जन्मे, लेकिन अपनी भक्ति, सादगी और उच्च विचारों के कारण उन्होंने समाज में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त किया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि महानता जन्म से नहीं, बल्कि कर्म और विचारों से प्राप्त होती है।

मंत्री राजपूत ने कहा कि संत सेन जी महाराज पेशे से नाई समाज से जुड़े थे, लेकिन उन्होंने अपने कर्म को ही पूजा मानते हुए समाज सेवा को अपना धर्म बना लिया। वे एक महान संत, समाज सुधारक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित हुए। उन्होंने कहा कि संत सेन जी महाराज का नाम भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में आदर के साथ लिया जाता है और वे संत कबीर तथा संत रविदास जैसे महान संतों के समकालीन थे।

उन्होंने आगे कहा कि संत सेन जी महाराज ने अपने जीवन के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों जैसे जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव का सशक्त विरोध किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि ईश्वर की दृष्टि में सभी मनुष्य समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव समाज को कमजोर करता है। उनका जीवन सादगी, सेवा और समर्पण का प्रतीक था। वे मानते थे कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें मानव सेवा और करुणा का भाव शामिल हो।

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि संत सेन जी महाराज ने समाज को यह सिखाया कि कर्म ही सबसे बड़ी पूजा है और हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। उन्होंने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि हम अपने जीवन में संत सेन जी के आदर्शों को अपनाएं, तो समाज में व्याप्त कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो सकता है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में संत सेन जी महाराज के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। आधुनिक समाज में जहां भौतिकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, वहां संतों के आदर्श हमें संतुलन और सही दिशा प्रदान करते हैं। समाज को मजबूत बनाने के लिए शिक्षा, संगठन और आपसी सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं, और यह सभी बातें संत सेन जी के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।

मंत्री राजपूत ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और समानता स्थापित करना भी है। उन्होंने कहा कि संतों और महापुरुषों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे संत सेन जी महाराज के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति में सेवा, समानता और भाईचारे की भावना विकसित होगी, तभी एक सशक्त और समरस समाज का निर्माण संभव होगा।

कार्यक्रम में सेन समाज के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और संत सेन जी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने समाज के युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे शिक्षा को प्राथमिकता दें और समाज के उत्थान में अपनी भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया। समाज के वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया और युवाओं को समाज सेवा के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे संत सेन जी महाराज के बताए मार्ग पर चलकर समाज में एकता, समरसता और भाईचारे को बढ़ावा देंगे। पूरे आयोजन ने न केवल संत सेन जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि समाज को एक नई दिशा और प्रेरणा भी प्रदान की।

इस प्रकार राहतगढ़ में आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक जागरूकता, सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक चेतना का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर एकता का संदेश दिया।

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