सागर जिले में जल संरक्षण को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देशन में संचालित “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत विभिन्न जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद और उसकी नवांकुर संस्था “माहिम बुंदेलखंड” द्वारा दीवार लेखन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया जा रहा है।
इस अभियान के तहत संस्था के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने गांवों के सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख दीवारों और चौराहों पर प्रेरणादायक नारे लिखे। इन नारों के माध्यम से लोगों को जल की महत्ता, उसके संरक्षण और वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। सरल और सीधे संदेशों के जरिए यह समझाया जा रहा है कि “जल है तो कल है” और यदि अभी से जल स्रोतों की रक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में दीवार लेखन जैसे पारंपरिक माध्यम आज भी अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं। जहां डिजिटल माध्यमों की पहुंच सीमित होती है, वहां इस प्रकार की गतिविधियाँ सीधे लोगों के जीवन से जुड़ती हैं और लंबे समय तक प्रभाव छोड़ती हैं। यही कारण है कि इस अभियान के तहत दीवार लेखन को एक प्रमुख माध्यम के रूप में अपनाया गया है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों—जैसे कुएं, बावड़ियां और तालाब—के संरक्षण के प्रति जन-भागीदारी सुनिश्चित करना है। इन जल स्रोतों की सफाई, मरम्मत और संरक्षण से न केवल जल स्तर में सुधार होता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता भी बढ़ती है। साथ ही वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देकर भविष्य के लिए जल का भंडारण सुनिश्चित किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के समन्वयकों ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से लोगों में जागरूकता के साथ-साथ जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। जब लोग स्वयं आगे आकर जल स्रोतों की देखभाल करते हैं, तो यह अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले लेता है।

इस दौरान नवांकुर संस्था के वॉलंटियर्स और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। लोगों ने न केवल दीवार लेखन में सहयोग किया, बल्कि जल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने का भी संकल्प लिया। यह सहभागिता इस बात का संकेत है कि समाज अब पर्यावरण के प्रति अधिक सजग और जिम्मेदार हो रहा है।
कलेक्टर प्रतिभा पाल के मार्गदर्शन में चल रहा यह अभियान प्रशासन और समाज के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जन-जागरूकता फैलाने के लिए इस प्रकार की पहल अत्यंत आवश्यक है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि दीवार लेखन जैसी सरल लेकिन प्रभावी विधियों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। यदि इसी तरह समाज की भागीदारी बनी रही, तो निश्चित रूप से जल संकट जैसी समस्या से निपटने में सफलता प्राप्त की जा सकती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।