सागर जिले में प्रशासनिक कार्यों को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिभा पाल ने राजस्व अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक में उन्होंने राजस्व, कृषि, राहत एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े कई अहम निर्देश दिए, जिनका उद्देश्य आम नागरिकों और किसानों को त्वरित और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक के दौरान कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि उर्वरकों का वितरण केवल ई-टोकन प्रणाली के माध्यम से ही किया जाए। किसी भी अन्य तरीके से वितरण को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। यह निर्णय पारदर्शिता बनाए रखने और किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए लिया गया है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि ई-टोकन प्रणाली का सख्ती से पालन हो और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

नरवाई जलाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस संबंध में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए, साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना वसूला जाए और आवश्यक होने पर पुलिस कार्रवाई तथा एफआईआर भी दर्ज की जाए।
उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी प्रभावित होती है, इसलिए इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है।
आरसीएमएस और राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर जोर
बैठक में राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि आरसीएमएस (Revenue Case Management System) के तहत लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्रता से निपटाया जाए। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने न्यायालयों में लंबित मामलों के निराकरण के लिए पक्षकारों से संवाद स्थापित करें और अन्य विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें।
उन्होंने यह भी कहा कि राजस्व प्रकरणों में आदेश जारी होते ही उनका तत्काल अमल सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी न हो।
राहत राशि वितरण में देरी न हो
प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से प्रभावित लोगों को राहत राशि समय पर मिले, इसके लिए कलेक्टर ने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत से जुड़े सभी प्रकरणों का शीघ्रता से निपटान किया जाए और पात्र हितग्राहियों को तुरंत सहायता राशि प्रदान की जाए।
फार्मर रजिस्ट्री और अन्य कार्यों में तेजी लाने के निर्देश
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने किसानों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री, नक्शा सुधार, फौती नामांतरण जैसे प्रकरण लंबित नहीं रहने चाहिए। इन कार्यों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि खरीफ सीजन से पहले फार्मर रजिस्ट्री का कार्य पूर्ण कर लिया जाए, ताकि किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने में कोई परेशानी न हो।

डिजिटलाइजेशन और पारदर्शिता पर जोर
बैठक में कलेक्टर ने राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी इस कार्य को शीघ्रता, शुद्धता और पारदर्शिता के साथ पूरा करें। डिजिटल रिकॉर्ड से न केवल कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।
इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को आई-गॉट कर्मयोगी योजना के अंतर्गत पंजीयन कराने और प्रशिक्षण लेने के निर्देश दिए। ईएचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से सर्विस बुक को ऑनलाइन करने के लिए भी कहा गया।
अतिक्रमण हटाने और जनसुनवाई पर ध्यान
कलेक्टर ने तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए निर्देश दिए कि वर्षा ऋतु से पहले सभी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई मिशन मोड में पूरी की जाए। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदारों को नियमित जनसुनवाई आयोजित करने और नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के लिए भी कहा।
उपार्जन कार्यों की निगरानी
कृषि उपार्जन कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कलेक्टर ने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों के उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने खरीदी, उठाव और परिवहन की व्यवस्थाओं को भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

बैठक में मौजूद रहे अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर कलेक्टर अविनाश रावत सहित विभिन्न शाखाओं के प्रभारी अधिकारी, सभी अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभी को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी के साथ करने के निर्देश दिए गए।
सागर जिले में आयोजित इस समीक्षा बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब अधिक सख्ती और जवाबदेही के साथ काम कर रहा है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देशों से यह उम्मीद की जा रही है कि राजस्व और कृषि से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता को समय पर सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
इन कदमों से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि किसानों और आम नागरिकों का शासन पर विश्वास भी और अधिक सुदृढ़ होगा।