भू-अर्जन प्रकरणों में लापरवाही पर कलेक्टर सख्त !

Spread the love

सागर जिले में विकास परियोजनाओं को गति देने और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से कलेक्टर प्रतिभा पाल ने भू-अर्जन प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। कलेक्टर कार्यालय के एनआईसी कक्ष में आयोजित इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपसी सहमति से जुड़े मामलों और 2 से 5 वर्ष तक लंबित भू-अर्जन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में अपर कलेक्टर अविनाश रावत, सभी एसडीएम (राजस्व), लोक निर्माण विभाग, सेतु निर्माण, रेलवे, National Highways Authority of India (एनएचएआई) सहित विभिन्न विभागों और एजेंसियों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में लंबित भू-अर्जन मामलों की स्थिति की समीक्षा करना और उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना था।

लंबित प्रकरणों पर प्राथमिकता से कार्रवाई

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि 2 से 5 वर्षों से लंबित भू-अर्जन प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों के कारण न केवल प्रभावित भू-स्वामियों को परेशानी होती है, बल्कि विकास परियोजनाएं भी प्रभावित होती हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आपसी सहमति के प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए। ऐसे मामलों में त्वरित निर्णय लेकर भू-स्वामियों को मुआवजा राशि का वितरण किया जाए और संबंधित विभागों को भूमि उपलब्ध कराई जाए।

तय समय सीमा में हो निराकरण

कलेक्टर ने कहा कि भू-अर्जन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जानी चाहिए। उन्होंने एसडीएम को निर्देश दिए कि प्रस्ताव प्राप्त होते ही जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करें और किसी भी प्रकार की देरी न होने दें।

उन्होंने यह भी कहा कि अवॉर्ड पारित होने के बाद एसडीएम अपने कार्य को शीघ्रता से पूर्ण करें और सभी आवश्यक दस्तावेजों, जैसे खसरा प्रतियों को पेमेंट पत्रकों के साथ संलग्न करें।

मुआवजा वितरण और कब्जा दिलाने पर जोर

बैठक में कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए कि जिन मामलों में मुआवजा राशि का वितरण किया जा चुका है, वहां से अतिक्रमण हटाकर संबंधित एजेंसियों को भूमि का कब्जा दिलाया जाए। इससे विकास कार्यों को समय पर शुरू करने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि भू-अर्जन के कारण किसी भी परियोजना के शुरू होने में देरी नहीं होनी चाहिए। संबंधित विभागों को समय पर भूमि उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

खसरे में नाम दर्ज करने के निर्देश

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने निर्देश दिए कि अर्जित की गई भूमि को संबंधित विभाग के नाम खसरे में दर्ज किया जाए। इससे भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सकेगा।

धारा 11, 19 और 21 में धीमी प्रगति पर नाराजगी

बैठक के दौरान कलेक्टर ने धारा 11, 19 और 21 के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भू-अर्जन प्रकरणों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कार्य में ढिलाई बरती गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े भू-अर्जन प्रकरणों की समीक्षा की गई। इनमें लोक निर्माण विभाग, सेतु निर्माण, रेलवे आरओबी, दिल्ली-नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर, सागर-दमोह मार्ग और जल संसाधन विभाग की परियोजनाएं शामिल हैं।

इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए, ताकि विकास कार्य समय पर शुरू हो सकें और क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सके।

एजेंसियों को सजगता से कार्य करने के निर्देश

कलेक्टर ने संबंधित एजेंसियों को भी निर्देशित किया कि वे भू-अर्जन प्रक्रिया में पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। प्रस्ताव मिलते ही त्वरित कार्रवाई करें और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर कार्यों को समय पर पूरा करें।

सागर जिले में आयोजित इस समीक्षा बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन अब विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। कलेक्टर प्रतिभा पाल के सख्त निर्देशों से यह उम्मीद की जा रही है कि भू-अर्जन से जुड़े लंबित प्रकरणों का जल्द समाधान होगा और विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

इन प्रयासों से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार होगा, बल्कि आम नागरिकों, विशेष रूप से किसानों और भू-स्वामियों को भी राहत मिलेगी। जिले में विकास की रफ्तार तेज होने के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *