मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राजधानी भोपाल में आज बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए और राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य करना उनके आत्मसम्मान के साथ-साथ उनके पेशेवर अनुभव का भी अपमान है।
प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और अपनी योग्यता पहले ही साबित कर चुके हैं। ऐसे में दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) देने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि यह उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। कई शिक्षकों ने बताया कि वे पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्कूल की ड्यूटी भी निभा रहे हैं, ऐसे में फिर से परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए बेहद कठिन है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि यदि वे पहले ही पात्रता परीक्षा पास कर चुके हैं और वर्षों से सेवा दे रहे हैं, तो उन्हें दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है। शिक्षकों ने इसे “अनुचित और अपमानजनक” बताते हुए कहा कि यह उनके अनुभव और समर्पण की अनदेखी है।
प्रदर्शन के दौरान कई शिक्षक भावुक भी नजर आए। एक शिक्षक ने कहा, “हमने अपनी जिंदगी के कई साल बच्चों को शिक्षित करने में लगाए हैं। अब हमें फिर से परीक्षा देने के लिए कहना ऐसा है जैसे हमारी मेहनत और योग्यता पर सवाल उठाया जा रहा हो।” उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।

शिक्षकों की मुख्य मांगों में दोबारा परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त करना, पहले से कार्यरत शिक्षकों को स्थायी मान्यता देना और सेवा के आधार पर मूल्यांकन करने की व्यवस्था लागू करना शामिल है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नीतियों में बदलाव करे और उनके साथ संवाद स्थापित करे।
इस मुद्दे पर शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार इस मामले पर विचार कर रही है। हालांकि, प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। यदि अनुभवी शिक्षक असंतोष के चलते अपने कार्य से विमुख होते हैं, तो इसका सीधा प्रभाव छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को इस मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ हल करना चाहिए।
वहीं, कुछ शिक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि समय-समय पर योग्यता का आकलन आवश्यक होता है, लेकिन इसके लिए वैकल्पिक और व्यावहारिक तरीके अपनाए जाने चाहिए, जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम या सेवा आधारित मूल्यांकन, न कि दोबारा परीक्षा।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में टीईटी को लेकर उठे इस विवाद ने शिक्षा व्यवस्था और नीति निर्माण पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार शिक्षकों के इस आक्रोश को किस तरह संबोधित करती है और क्या उनके हितों को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।