मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के आसपास एक बड़े शहरी विस्तार की दिशा में अहम कदम उठाते हुए सरकार ने “भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया” का दायरा तय कर दिया है। नगरीय विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में 6 जिलों के कुल 2510 गांवों को शामिल किया गया है। यह क्षेत्र लगभग 12,098 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा, जो राज्य के सबसे बड़े नियोजित शहरी क्षेत्रों में से एक बन सकता है।
इस मेट्रोपॉलिटन एरिया में सबसे ज्यादा 698 गांव राजगढ़ जिले के शामिल किए गए हैं। इसके अलावा सीहोर के 599, भोपाल के 527, रायसेन के 408, विदिशा के 191 और नर्मदापुरम के 87 गांव इस दायरे में आए हैं। खास बात यह है कि सीहोर जिले का लगभग 50% हिस्सा इस क्षेत्र में शामिल किया गया है, जबकि नर्मदापुरम का मात्र 7% हिस्सा ही इसमें जोड़ा गया है।
हालांकि क्षेत्रफल के लिहाज से सीहोर और राजगढ़ जिले बड़े हैं, फिर भी भोपाल जिले का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा इस मेट्रोपॉलिटन में शामिल हो गया है। भोपाल जिले के अंतर्गत बैरसिया तहसील के 210, हुजूर के 257 और कोलार तहसील के 60 गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है।
सरकार ने न केवल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का निर्धारण किया है, बल्कि इसके संचालन के लिए आवश्यक नियमों का मसौदा भी तैयार कर लिया है। इन नियमों को विधि विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। उम्मीद है कि मई महीने तक इन नियमों की अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी, जिसके बाद मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी का वास्तविक काम शुरू हो सकेगा।
नियमों के लागू होने के बाद अथॉरिटी से जुड़ी विभिन्न समितियों का गठन किया जाएगा और प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रतिनियुक्ति के माध्यम से की जाएगी, जिससे इस बड़े क्षेत्र के प्रबंधन और विकास को गति दी जा सके।

दायरा तय करने के पीछे की प्रमुख वजहें
सरकार ने इस मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का निर्धारण भविष्य की जरूरतों और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए किया है। सबसे महत्वपूर्ण योजना है भोपाल मेट्रो का विस्तार, जिसे आने वाले समय में मंडीदीप, सीहोर और बैरागढ़ तक ले जाने की योजना है।
इसके अलावा भोपाल और इंदौर के बीच फोरलेन (जिसे आगे चलकर सिक्स लेन बनाया जाना प्रस्तावित है) के आसपास “इकोनॉमिक कॉरिडोर” और “इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” विकसित करने की योजना है। इससे औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मंडीदीप, पीलूखेड़ी, बाबई-मोहासा, तामोट, इटारसी, मालीखेड़ी और बगरोदा जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को इस मेट्रोपॉलिटन एरिया में शामिल किया गया है। इससे इन क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करना आसान होगा और शहरी सुविधाओं का विस्तार भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
कनेक्टिविटी और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भोपाल मेट्रोपॉलिटन का पश्चिमी हिस्सा सड़क नेटवर्क के माध्यम से उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से भी जुड़ने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के गठन से निवेश की संभावनाएं काफी बढ़ेंगी। भूमि आवंटन की प्रक्रिया आसान होगी, जिससे उद्योगों और रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा मिलेगा। साथ ही, योजनाबद्ध विकास के कारण अव्यवस्थित शहरीकरण को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
अब सभी की नजरें मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के गठन और उसके कामकाज के नियमों पर टिकी हैं। जैसे ही विधि विभाग से मंजूरी मिलती है, इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेजी से काम शुरू होने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में भोपाल मेट्रोपॉलिटन एरिया का गठन राज्य के शहरी विकास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।